दूल्हे के घोड़ी में बैठने से मचा बवाल,गांव वालों ने किया पथराव

सागर के बंडा थाना क्षेत्र के ग्राम गनियारी में एक दलित युवक की घोड़ी पर बारात निकली। बारात के निकलते ही गांव के ही कुछ लोगों ने दूल्हे के घर पर पथराव कर दिया और बाहर खड़े वाहनों में तोड़फोड़ की। इसके बाद गांव का माहौल बिगड़ गया। तनाव बढ़ने के सूचना पर पुलिस ने तत्काल मौके पर पहुंच और मोर्चा संभाला। स्थिति को नियंत्रण में लेने के बाद उपद्रव मचाने वालों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की गई है।

और पढ़े…पतंग उड़ाते वक्त नहर में गिरा बच्चा, नहीं मिली 2 दिन तक लाश
इन गांवो में आज तक दलित दूल्हा घोड़ी पर नहीं बैठा

चड़ी, नीम का खेड़ा, भैरूपुरा, राजपुरा, गांधी गांव, सरस्वती का खेड़ा, संगावदा, गुर्जरों की थड़ी, लांबाखोह, बावड़ी खेड़ा, सांकड़दा, सिंगता, गरनारा, मायजा, जलोदा, चितावा, गामछ, मायजा, जलोदा, चितावा, लक्ष्मीपुरा, खेरोली, सुनगर, सीतापुरा, डोलर, बोरदामाल, कोटड़ी, हांडीखेड़ा, आंजदा, डोलर,लबाना, देइखेड़ा, गुढ़ा, चांदण खुर्द, बाबई, बलवन, मोहनपुरा, कुआं, सामरबा, अजेता, झालीजी, जयथामल, जजावर, फतेहपुरा, सिसोसला, तंवर का झोंपड़ा, चतरगंज, बांसी, खजूरी, धाबाइयों का ग्राम आदि गांवों में पुलिस ने समानता समितियां बनाई है। पुलिस अधीक्षक ने सर्वे करवाया तो सामने आया था कि इन गांवों में पिछले 75 साल से या तो दलित दूल्हे को घोड़ी पर नहीं बैठने दिया गया और अगर बैठ गया तो दबंगों ने उसे जबरन नीचे उतार दिया। सोमवार को चड़ी गांव में पहली बार दलित दूल्हा घोड़ पर चढ़कर बारात लेकर वधू पक्ष के यहां पहुंचा। गांव में बाबाूलाल मेघवाल की बेटी द्रोपदी की शादी श्रीराम से हुई है। पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों ने बाबूलाल के साथ बारातियों का स्वागत किया।

और पढ़े…शहडोल में एक बुजुर्ग ने की आत्महत्या


ऊंच-नीच का भेद मिटाने का प्रयास

जिला कलेक्टर रेणू जयपाल ने बताया कि आपरेशन समानता दलित दूल्हों को घोड़ी से उतारने से रोकने जैसी घटनाओं को बंद करने लिए चलाया गया है। प्रयास है कि अब बूंदी जिले में किसी दलित दूल्हे को कभी भी घोड़ी से नहीं उतारा जाए। समानता समितियों के माध्यम से लोगों को समझाया जाएगा कि सभी मानव एक हैं। ऊंच-नीच का भेदभाव मिटाने का प्रयास होगा। समितियां गांवों में लोगों को एकजुट करने का काम करेगी।