स्टेच्यु ऑफ वननेस से बनेगा ओंकारेश्वर वैश्विक महत्व का स्थल – सीएम चौहान

स्टेच्यु ऑफ वननेस मीटिंग
स्टेच्यु ऑफ वननेस मीटिंग

बुलंदसोच न्यूज़,भोपाल।

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान मंत्रालय में आचार्य शंकर सांस्कृतिक एकता न्यास के न्यासी मंडल की दूसरी बैठक को संबोधित कर रहे थे। प्रमुख संत और न्यास सदस्य स्वामी अवेधशानंद गिरि जी महाराज, स्वामी परमात्मानंद सरस्वती जी महाराज, स्वामी चिदानन्दपुरी जी, स्वामी हरिब्रम्हेन्द्रानंद जी महाराज, श्री मुकुल कानिटकर जी, स्वामी मित्रानंद जी, पद्मश्री वी.आर. गौरीशंकर जी एवं स्वामी वेदतत्वानंदजी उपस्थित थे। स्वामी स्वरूपानंद जी, चिन्मय मिशन, आस्ट्रेलिया और निवेदिता दीदी विवेकानंद केन्द्र कन्याकुमारी ने वुर्चअल भागीदारी की।

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने कहा कि ओंकारेश्वर में शंकराचार्य जी की प्रतिमा की स्थापना सिर्फ प्रतिमा स्थापना कार्य ही नहीं बल्कि जीवन में व्यवहारिक वेदांत कैसे उतारा जाए इसका प्रकल्प है। यह दुनिया एक परिवार बने, इसके पीछे ये भाव भी है। न्यास के सदस्यों द्वारा दिये गये सुझाव पर मध्यप्रदेश सरकार गंभीरता से अमल करेगी। प्राप्त सुझावों के अनुरूप संपूर्ण कार्य-योजना को अंतिम स्वरूप देने के लिए तेजी से कार्य होगा।

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संस्कृति मंत्री श्री ऊषा ठाकुर ने इस प्रकल्प के संबंध में नागरिकों में उत्साह के प्रगटीकरण की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि इस प्रकल्प के पूरा होने के बाद ओंकारेश्वर के महत्व में और भी वृद्धि हो जाएगी।

आमंत्रित संतों और न्यासियों के विचार

स्वामी अवधेशानंद जी और विभिन्न राज्यों से आए न्यास के सदस्यों ने विचार रखे। महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद जी ने कहा कि शंकराचार्य जी की दीक्षा भूमि और मध्यप्रदेश में स्टेच्यु ऑफ वननेस के निर्माण का कदम प्रेरक और अकल्पनीय है। यह विश्वव्यापी केन्द्र बनेगा। स्वामी जी ने कहा कि कोरोना काल में आयुर्वेद और योग के प्रति सभी का ध्यान आकर्षित हुआ। इनसे मानवीय मन को संबल भी मिला। इस अवधि में आध्यात्मिक स्वीकृति भी उत्पन्न हुई है। एकत्व का विचार प्रबल हुआ है।

स्वामी परमात्मानंद ने कहा कि इस प्रकल्प से सभी जुड़ना चाहेंगे। मुख्यमंत्री श्री चौहान की यह महत्वपूर्ण नेतृत्वकारी पहल है। स्वामी हरिब्रम्हेन्द्रानंद ने कहा कि आमजन के उद्धार का कार्य है। यह केन्द्र दर्शनीय रहेगा, इससे जन-जन जुड़ेगा। स्वामी मित्रानंद ने कहा कि निश्चित ही यह अद्भुत कार्य हो रहा है। श्री मुकुल कानिटकर ने कहा कि ओंकारेश्वर प्रकल्प के क्रियान्वयन से हम सभी धन्य हैं।

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ओंकारेश्वर में प्रकल्प के क्रियान्वयन में जो प्रमुख कार्य होंगे उनमें अंतर्राष्ट्रीय अद्वैत वेदांत संस्थान का निर्माण, संस्थान में सात केन्द्र जो स्कूल के रूप में कार्य करेंगे, शामिल हैं। अद्वैत वेदांत संस्थान अंतर्राष्ट्रीय शोध केन्द्र और समन्वय केन्द्र के रूप में कार्य करेगा। केन्द्र का मुख्य द्वार जगन्नाथ पुरी मंदिर के द्वार को अभिव्यक्त करेगा। कलात्मक शैली में निर्माण कार्य संपन्न होंगे। प्रेजेंटेशन में बताया गया कि ओंकारेश्वर में किए गए कार्यों के फलस्वरूप टेंपल टाउन की छवि विकसित होगी। परिसर में कई दर्शनीय स्थान होंगे। यहाँ आने वाले पर्यटक और श्रद्धालु विभिन्न गतिविधियों में भी हिस्सा ले सकेंगे। संपूर्ण क्षेत्र हरियाली से अच्छादित होगा। एक गुरुकुल भी बनेगा।

प्रकल्प की यात्रा के अहम पड़ाव

बैठक में एक लघु फिल्म भी दिखाई गई, जिसमें इस प्रकल्प में अब तक के अहम पड़ाव की जानकारी दी गई। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने नर्मदा सेवा यात्रा के दौरान 9 फरवरी 2017 को आचार्य शंकर की प्रतिमा स्थापित करने की घोषणा की थी। मुख्यमंत्री श्री चौहान द्वारा ओंकारेश्वर में शंकराचार्य जी की भव्य और विशाल प्रतिमा की स्थापना और म्यूजियम प्रारंभ करने की घोषणा के बाद एक मई 2017 को प्राकट्य पंचमी उत्सव मनाया गया था। इसके बाद 19 दिसम्बर 2017 से 22 जनवरी 2018 तक एकात्म यात्रा और धातु संग्रहण अभियान संचालित किया गया। एकात्म पर्व भी मनाया गया। इसके बाद 27 जनवरी 2018 को आचार्य शंकर सांस्कृतिक एकता न्यास का गठन किया गया। प्रेजेंटेशन में बताया गया कि शंकराचार्य जी की प्रतिमा स्थापना प्रकल्प की भावना से जन-मानस भी जुड़ा है। न्यास द्वारा शंकर व्याख्यानमाला, प्रेरणा संवाद, शंकर चित्रकला कार्यशाला एवं प्रदर्शनी, शंकर संगीत, नाटक और अद्वैत उत्सव के आयोजन, शंकर फैलोशिप, अद्वैत जागरण शिविर और सागर केंद्रीय विश्वविद्यालय में संगोष्ठी भी आयोजित की गई, जिसमें करीब तीन सौ शोध- पत्र प्रस्तुत हुए थे।

न्यास की आगामी गतिविधियों में देश के प्रख्यात मूर्तिकारों द्वारा निर्मित मूर्तियों में उत्कृष्ट का चयन, आचार्य शंकर के जीवन दर्शन पर विभिन्न शैलियों में देश के विख्यात चित्रकारों से चित्रांकन, मेकिंग ऑफ मेमोरियल ओंकारेश्वर प्रकल्प की यात्रा का दस्तावेजीकरण, आचार्य शंकर की संपूर्ण रचनाओं का विभिन्न भाषाओं में डिजिटलाइजेशन और प्रकाशन, लिविंग ट्रेडीशन ऑफ शंकर-वर्तमान भारत में आचार्य शंकर की स्मृतियों का दस्तावेजीकरण और आचार्य शंकर के जीवन दर्शन पर फिल्म-निर्माण शामिल है।

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मुख्यमंत्री श्री चौहान ने जूना अखाड़े के महामंडलेश्वर स्वामी श्री अवधेशानंद गिरी स्वामी एवं आचार्य शंकर सांस्कृतिक एकता न्यास की बैठक में हिस्सा लेने के लिए पधारे अन्य न्यास सदस्यों और संतों का स्वागत किया। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने स्वामी अवधेशानंद जी एवं आमंत्रित संतों से आशीर्वाद भी प्राप्त किया। बैठक के प्रारंभ और समापन पर मंत्रों का सामूहिक उच्चारण भी हुआ।

मुख्य सचिव श्री इकबाल सिंह बैंस, अपर मुख्य सचिव श्री नर्मदा घाटी विकास श्री आईसीपी केशरी, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव श्री मनीष रस्तोगी, प्रमुख सचिव और आयुक्त जनसंपर्क श्री राघवेन्द्र कुमार सिंह, संचालक जनसंपर्क श्री आशुतोष प्रताप सिंह और अन्य अधिकारी उपस्थित थे।