फर्जी भर्ती मामला।अनूपपुर सीएमएचओ के मंसूबे में फिरा पानी,संचालनालय ने नियुक्ति को अवैध मानकर वेतन भुगतान में लगाई रोक

फर्जी भर्ती मामला।अनूपपुर सीएमएचओ के मंसूबे में फिरा पानी,संचालनालय ने नियुक्ति को अवैध मानकर वेतन भुगतान में लगाई रोक
फर्जी भर्ती मामला।अनूपपुर सीएमएचओ के मंसूबे में फिरा पानी,संचालनालय ने नियुक्ति को अवैध मानकर वेतन भुगतान में लगाई रोक

बुलंदसोच,29 जुलाई 2021 भोपाल/अनूपपुर।

मलेरिया कार्यक्रम अंतर्गत अवैध रूप से 14 पदों पर भर्ती किये गए कर्मचारियों के वेतन भुगतान पर संचालनालय स्वास्थ्य सेवाएं के अतिरिक्त संचालक(वित्त) शैलेंद्र कुमार सिंह ने आदेश जारी कर रोक लगा दी है।

जारी आदेश में लिखा है कि जिला मलेरिया कार्यालय अनूपपुर हेतु स्वीकृति 14 पदों पर बिना विज्ञापन जारी किए अवैध रूप से फर्जी भर्ती कर ली गई थी।जिसकी शिकायत उपरांत जांच में अवैध पाए जाने पर कलेक्टर अनूपपुर ने उक्त भर्तियों को निरस्त कर दिया गया था।क्षेत्रीय संचालक स्वास्थ्य सेवाएं रीवा के द्वारा नियुक्ति के संबंध में जांच करवाई गई जिसमें भी भर्ती को अवैध माना गया था।भर्ती हुए अभ्यर्थियों के द्वारा उच्च न्यायालय में अपील कर स्थगन आदेश ले लिया गया था।उच्च न्यायालय के द्वारा अंतरिम राहत के तौर पर यह निर्देश दिए गए थे कि यदि कोई वैधानिक समस्या नहीं है तभी इनका वेतन दिया जाय।उपरोक्तानुसार प्रकरण वर्तमान में न्यायालय में विचाराधीन है।अतः प्रकरण में माननीय उच्च न्यायालय द्वारा स्पष्ट निर्देश/अंतिम निर्णय होने तक उपरोक्त 14 पदों पर भर्ती किये गए अभ्यर्थियों का भुगतान न किया जाए।


गौरतलब है कि अनूपपुर सीएमएचओ डॉ बी डी सोनवानी ने विगत वर्ष पूर्व शासन के नियमों और निर्देशों को धता बताते हुए अवैध रूप से फर्जी भर्ती कर लिए थे।जिसे जांच उपरांत निरस्त कर दिया गया था।सीएमएचओ सोनवानी न्यायालय के स्थगन आदेश और वैधानिक समस्या न होने पर वेतन भुगतान के निर्देश को न्यायालय का आदेश मानकर 14 पदों पर अवैध रूप से नियुक्त कर्मचारियों को वेतन भुगतान करने के प्रयास में थे,इनके इस मंसूबे पर संचालनालय ने पानी फेर दिया है।

वेतन भुगतान के फिराक में थे सीएमएचओ सोनवानी

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विभागीय सूत्रों की मानें तो सीएमएचओ डॉ सोनवानी द्वारा 14 पदों पर मोटी रकम लेकर फर्जी भर्ती की गई थी।लेकिन जब मीडिया में खबरें आईं तो कलेक्टर ने जांच कर नियुक्ति को निरस्त कर दिया गया।विभागीय जांच में नियुक्ति को अवैध माना गया।बाबजूद इसके डॉ सोनवानी ने अवैध रूप से नियुक्त हुए अभ्यर्थियों को नियुक्ति करने का आश्वासन देकर न्यायालय जाने की सलाह दी गई।न्यायालय ने स्थगन आदेश देते हुए स्पष्ट निर्देश दिया कि यदि वैधानिक समस्या नहीं है तो वेतन का भुगतान किया जाय।वैधानिक समस्या होने के बावजूद डॉ सोनवानी लगातार इस प्रयास में थे कि किसी भी प्रकार से वेतन का भुगतान कर दिया जाय।लेकिन संचालनालय ने आदेश जारी कर वेतन भुगतान पर रोक लगा दी है।

न्यायालय जाने के माहिर खिलाड़ी डॉ सोनवानी

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आपको बता दें कि डॉ बी डी सोनवानी न्यायालय जाने के लिए जाने जाते हैं।अनूपपुर जिले में यह कहावत हो चुकी है कि कुछ भी होगा तो डॉ साहब कोर्ट चले जायेंगे।इनसे बच के रहने की आवश्यकता है।जहां इन्होंने फर्जी नियुक्ति कर अभ्यर्थियों को न्यायालय जाने की सलाह दी।वहीं कोविड की दूसरी लहर में जब शासन ने इनकी लापरवाही रवैये को देखते हुए सीएमएचओ के पद से हटाया।तो इन्होंने न्यायालय की शरण मे जा कर स्टे ला लिया।कहा जाता है कि ये गलत काम करने के बाद अक्सर न्यायालय के शरण मे जाते रहते हैं।इनका विवादों से पुराना नाता है।