नगर निगम पर लोकायुक्त का शिकंजा:उज्जैन नगर निगम के चार अधिकारियों के खिलाफ लोकायुक्त पुलिस ने दर्ज किया केस, कोर्ट के स्टे के बावजूद करोड़ों की विवादित भूमि पर बिल्डर को कॉमर्शियल निर्माण की दे दी अनुमति

उज्जैन लोकायुक्त पुलिस ने नगर निगम के चार अधिकारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार का केस दर्ज किया है

  • भूमि स्वामियों के बीच न्यायालय में चल रहा है विवाद
  • निगमायुक्त ने भवन निर्माण पर लगाई रोक

उज्जैन लोकायुक्त पुलिस ने नगर निगम के चार अधिकारियों और एक बिल्डर के खिलाफ भ्रष्टाचार का केस दर्ज किया है। अधिकारियों ने कोर्ट के स्टे के बावजूद और नियम विरुद्ध तरीके से बिल्डर को एक विवाविद भूमि पर भवन निर्माण की अनुमति दे दी। प्राथमिक जांच के बाद लोकायुक्त ने नगर निगम के तत्कालीन नगर निवेशक मनोज पाठक, तत्कालीन भवन अधिकारी रामबाबू शर्मा, अरुण जैन, भवन निरीक्षक मीनाक्षी शर्मा और बिल्डर सुशील जैन के खिलाफ शनिवार को भ्रष्टाचार का केस दर्ज किया। सभी आरोपी वर्तमान समय में नगर निगम में कार्यरत हैं। हालांकि मामला संज्ञान में आते ही वर्तमान निगमायुक्त क्षितिज सिंघल ने भवन निर्माण अनुज्ञा पर रोक लगा दी है। लोकायुक्त जांच अधिकारी ने कहा कि विवेचना के दौरान अगर निगमायुक्त की मामले में सलिप्तता पाई जाती है तो उनके विरुद्ध भी केस दर्ज होगा।

यह है मामला

लोकायुक्त पुलिस इंसपेक्टर बसंत श्रीवास्तव ने बताया कि मामला विक्रम विश्वविद्यालय मार्ग फ्रीगंज स्थित संपत्ति क्रमांक- 40 की सहस्वामिनी दिव्या सिंह से जुड़ा है। दिव्या सिंह ने लोकायुक्त में शिकायत की थी कि उक्त आवासीय भूमि के अन्य सह स्वामियों ने इंदौर के बिल्डर सुशील जैन की कंपनी आरएम विना इस्टेट डेवलपर्स प्रा. लि. को संपूर्ण संपत्ति को स्वयं की बताते हुए बेच दिया। जिसमें मेरी हिस्से की भी भूमि शामिल है। जबकि उक्त संपत्ति का अब तक वैधानिक बंटवारा नहीं हुआ है। सुशील जैन ने उज्जैन नगर निगम से नियम विरुद्ध तरीके से उक्त भूमि पर भवन निर्माण की अनुमति ले ली है।

इंसपेक्टर श्रीवास्तव ने बताया कि इस शिकायत की प्रारंभिक जांच की गई तो पता चला कि शिकायतकर्ता दिव्या सिंह ने उक्त संपत्ति से न तो अपना हिस्सा बेचा है और न ही उक्त भूमि पर किसी तरह के निर्माण किए जाने की सहमति प्रदान की है। उक्त संपत्ति के अन्य हिस्सेदारों और दिव्या सिंह के बीच स्वामित्व को लेकर मामला कोर्ट में विचाराधीन है और अदालत ने निर्माण पर स्टे का आदेश दिया है।

नामांतरण रजिस्टर में वारिसों के नाम ही गायब कर दिया

लोकायुक्त इंसपेक्टर ने बताया कि जांच में नगर निगम ऐसी नामांतरण नस्ती प्रस्तुत करने के असफल रहा, जिससे यह स्पष्ट होता कि दिव्या सिंह के पिता प्रयाग सिंह की मृत्यु के बाद उनके वारिसों के नाम रिकॉर्ड में लिए गए हों। जांच में यह भी सामने आया कि नामांतरण रजिस्टर में अंतिम परिणाम का उल्लेख नहीं है। नगर निगम ने उक्त संपत्ति के एक अन्य हिस्सेदार हुरमत सिंह का नाम संपत्तिकर, समयकित कर व अन्य कर निर्धारण रजिस्टर से गायब कर सुशील जैन का नाम दर्ज कर दिया।

इसके अलावा उक्त संपत्ति के नामांतरण में नगर निगम ने प्रयाग सिंह (शिकायतकर्ता दिव्या सिंह के पिता) के वारिसों के नाम ही नहीं दर्ज किए और गैरकानूनी तरीके से बिल्डर सुशील जैन के पक्ष में भवन निर्माण की अनुमति आदेश जारी कर दिया।

नगर निगम ने नियमों को ताक पर रख कर दी मॉल बनाने की अनुमति


जांच में पाया गया कि संपत्ति के अन्य सहस्वामीगण ने संपत्ति बेची है लेकिन प्रयाग सिंह व हुरमत सिंह ने अपना हिस्सा सुशील जैन को बेचा हो, ऐसा उल्लेख नामांतरण रजिस्टर में नहीं मिला। नगर निगम ने 14 मई 2019 को उक्त भूमि जो कि आवासीय उपयोग के लिए थी, उस पर व्यावसायिक उपयोग के लिए अनुमति प्रदान कर दी। इसके लिए अधिकारियों ने नियमों को पूरी तरह से ताक पर रख दिया था।

नगर एवं ग्राम निवेश (टी एडं सी) ने भी न तो ले-आउट स्वीकृत किया और न ही नगर निगम से निर्माण की अनुमति ली। इस तरह से 14 मई 2019 को दी गई अनुमति अवैध थी। इसके बावजूद 14 जुलाई 2020 को उक्त विवादित भूमि पर नगर निगम की ओर से मॉल बनाने की अनुमति दे दी गई।

निगमायुक्त की संलिप्तता मिलने पर कार्रवाई की जाएगी

इंसपेक्टर बसंत श्रीवास्तव ने बताया कि प्रारंभिक जांच में निगमायुक्त क्षितिज सिंघल की संलिप्तता नहीं मिली है। विवेचना में अगर संलिप्तता मिली तो उनके विरुद्ध भी कार्रवाई की जाएगी।

किसकी क्या थी जिम्मेदारी

मनोज पाठक- तत्कालीन नगर निवेशक मनोज पाठक वर्तमान समय मंे उज्जैन नगर निगम में ही अपर आयुक्त हैं। नगर निवेशक पद पर रहते हुए पाठक ने विवादित भूमि पर नक्शा पास किया था।

रामबाबू शर्मा- तत्कालीन भवन अधिकारी रामबाबू शर्मा ने भवन निर्माण की अनुमति दी थी। वर्तमान समय में वह उज्जैन नगर निगम में ही अधीक्षण यंत्री के पद पर हैं।

अरुण जैन- वर्तमान समय में अरुण नगर निगम में कार्यपालन यंत्री हैं। अरुण जैन ने भवन अधिकारी रहते हुए आवासीय भूमि को काॅमर्शियल के परिवर्तित किए जाने का आदेश दिया था।

मीनाक्षी शर्मा- मीनाक्षी शर्मा नगर निगम में भवन निरीक्षक के पद पर हैं। उन्होंने विवादित भूमि पर भवन निर्माण को रोकने के लिए कोई कदम नहीं उठाया था। मामला संज्ञान में आने के बाद वर्तमान आयुक्त क्षितिज सिंहल ने भवन अनुमति दिए जाने पर रोक लगाने के आदेश दिए हैं।