क्षेत्रीय कार्यालय, कलेक्टर ने फर्जी भर्ती प्रक्रिया को रद्द किया संचालनालय ने रोक लगाई फिर भी वेतन देने की तैयारी ?

अभिषेक 7987008303
भोपाल/ अनूपपुर
भ्रष्टाचार के भी अजीबोगरीब रंग होते जा रहे हैं । मध्यप्रदेश शासन द्वारा भर्ती को अवैध व रद्द करने के बावजूद भी अनूपपुर का मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी का कार्यालय लगता है फिर से फर्जी भर्ती कर्मचारियों को वेतन देने की तैयारी गुपचुप तरीके से कर रहा है। मलेरिया विभाग में फर्जी तरीके से भर्ती करने का प्रकरण जनवरी2020 में आया , उस समय रहे कलेक्टर चन्द्र मोहन ठाकुर के संज्ञान में आते ही दो महीने के अन्दर ही भर्ती प्रक्रिया को अवैध मानते हुए निरस्त कर दिया गया था। भर्ती कर्मचारियों ने इस पर न्यायालय की शरण ली ,जबलपुर हाई कोर्ट ने निर्णय दिया कि यदि कोई वैधानिक समस्या नही है तो मलेरिया कर्मचारियों का वेतन दिया जाय।
फर्जी भर्ती प्रक्रिया में शामिल रहे मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ बी डी सोनवानी एवं अन्य अधिकारी/ कर्मचारियों को क्षेत्रीय कार्यालय स्वास्थ्य रीवा ने भी तलब किया , त्रुटि पूर्ण भर्ती प्रक्रिया को मद्देनजर रखते हुए क्षेत्रीय कार्यालय रीवा ने भी भर्ती रद्द कर संबंधित अधिकारियों/ कर्मचारियों के खिलाफ कार्यवाही करने का आदेश जारी कर दिया, लेकिन भाजपा शासन में आजतक दोषी अधिकारियों के खिलाफ कोई कार्यवाही नही हुई।

मुख्यमंत्री ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के दौरान लापरवाही का आरोप लगाते हुए मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ बी डी सोनवानी को पद से हटा कर डॉक्टर सुरेश चंद्र राय को नया सीएमएचओ बनाया गया । नए सीएमएचओ डॉ राय ने फर्जी तरीके भर्ती हुए मलेरिया कर्मचारियों के वेतन देने के संबंध में जब स्वास्थ्य संचालनालय भोपाल से जानकारी मांगी तो संचालनालय ने भी किसी भी मद से न्यायालय के आदेश को मद्देनजर रखते हुए वेतन नही देने का आदेश दिया था।
न्यायालय से स्थगन आदेश दिये पर डॉक्टर बी डी सोनवानी के फिर से मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी के पद पर आसीन होते ही भ्रष्टाचार की संभावना बढ़ गई है क्योंकि फर्जी तरीके से भर्ती हुए मलेरिया कर्मचारियों को किसी भी मद से वेतन न देने का आदेश होते हुए भी कर्मचारियों से कार्य लिया जा रहा है।
अनूपपुर का स्वास्थ्य विभाग लगता है भ्रष्टाचार का गढ़ बनता जा रहा , फर्जी भर्ती हो या नियम विरुद्ध दवाई खरीद मामले में ईओडब्ल्यू का छापा , सीएचओ का नियम विरुद्ध स्थानांतरण ,एएनएम का नियम विरुद्ध स्थानांतरण । आखिर इसमें दोष किसका है ? निश्चित ही मध्यप्रदेश सरकार की जिसने अपनी आंखें बंद कर रखी हैं या यह भी हो सकता स्वास्थ्य विभाग के स्वास्थ्यमंत्री अधिकारियों ने भी अपनी आंखे फेर ली हों । यदि ऐसा ही रहा तो वह दिन दूर नही जब देश मे भ्रष्टाचार के लिए मध्यप्रदेश को नंबर वन कहा जाय।