सिंहपुर गोलीकांड: गैर इरादतन हत्या के आरोपी दरोगा- सिपाही ने पुलिस की मौजूदगी में किया सरेंडर

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एक दिन के रिमांड पर लिए गए दोनों आरोपी, थाना में गोली लगने से मौत का मामला, जमानत नहीं मिलने पर पांच महीने बाद हाजिर हुए दोनों आरोपी

सतना. सिंहपुर थाना में गोली लगने से मौत के मामले में आरोपी दरोगा और सिपाही की जमानत उच्च न्यायालय से निरस्त होने के बाद दोनों आरोपियों ने शुक्रवार को सरेंडर कर दिया। पूर्व से तय योजना के तहत थाना रामपुर बाघेलान में दोनों आरोपी आत्मसमर्पण करने पहुंचे। यहां से दोनों को नागौद की अदालत ले जाया गया। जहां से एसआइटी प्रमुख एसडीओपी पीएस परस्ते ने इन्हें एक दिन के पुलिस रिमांड पर लिया है।


पता चला है कि सिंहपुर कांड के आरोपी पुलिस उप निरीक्षक विक्रम पाठक और आरक्षक आशीष सिंह रामपुर बाघेलान थाना पहुंचे थे। यहीं स्पेशल इन्वेस्टीगेशन प्रभारी एसडीओपी सिरमौर पीएस परस्ते भी मौजूद रहे। दोनों आरोपियों का मेडिकल परीक्षण रामपुर बाघेलान में ही कराने के बाद आरोपियों को न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी नागौद रूपेश साहू की अदालत में पेश कर दिया गया। जहां से शनिवार की शाम ४ बजे तक का पुलिस रिमांड स्वीकृत किया गया है।


यह है मामला

27 सितंबर 2020 की रात सिंहपुर थाने के अंदर गोली लगने से नारायणपुर निवासी राजपति कुशवाहा की मौत हो गई थी। हिरासत में मौत की खबर बाहर आने के बाद राजनीति में उबाल आ गया था। जिला से लेकर राजधानी तक के नेता इस पर बयानबाजी कर रहे थे। इस बीच पुलिस अधीक्षक का तबादला कर दिया गया था और मामले की जांच के लिए एसआइटी गठित कर दी गई थी। स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम में जिले के बाहर के अधिकारियों कर्मचारियों को शामिल किया गया था। एसआइटी घटना के आरोपी तत्कालीन थाना प्रभारी विक्रम पाठक एवं सिपाही आशीष सिंह की गिरफ्तारी नहीं कर पाई थी। जब दोनों आरोपियों ने जमानत खारिज होने के बाद आत्मसमर्पण का मन बनाया तो इन्हें अदालत में पेश कराया गया।

सीसीटीवी को बंद कर भागे थे आरोपी

सिंहपुर थाना में गोली लगने से मौत के मामले में आरोपी दरोगा और सिपाही को फरार रहना मंहगा पड़ था। उच्च अदालत ने इनके जमानत आवेदन पर सुनवाई करते हुए इसी बात को गंभीरता से लिया था कि दोनों आरोपी घटना के बाद से ही फरार रहे और कानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं किया। यह बात भी गंभीरता से ली गई थी कि आरोपी सीसीटीवी कैमरे बंद कर भागे थे।
पुलिस को भनक नहीं लगी
स्थानीय पुलिस को इस बात की भनक भी नहीं लगी कि दोनों आरोपी आत्मसमर्पण करने आ रहे हैं। जबकि एसआइटी प्रमुख पहले से ही तैयार थे। अदालत की कार्रवाही में देरी नहीं हो और रिमांड मिल जाए इसके लिए पूर्व से ही योजना के तहत रामपुर बाघेलान मं ही मेडिकल परीक्षण और कागजी कार्रवाही पूरी कर आरोपियों को अदालत में पेश किया गया।