मध्य प्रदेश में राजनीतिक संरक्षण के तहत आबकारी अधिकारी, पुलिस और शराब ठेकेदारों के गठजोड़ से लाइसेंसी दुकानों से जहरीली शराब की बिक्री बढ़ी है। सागर में 25 लोगों की मौत के बाद यह मुद्दा फिर से सामने आया है। पूर्व में मुरैना, उज्जैन और इंदौर में भी जहरीली शराब से कई मौतें हो चुकी हैं। आबकारी अधिकारियों पर केवल निलंबन की कार्रवाई होती है और वे बाद में बहाल हो जाते हैं। सागर के एसपी अनुराग सुजानिया का संबंध मुरैना के पिछले जहरीली शराब कांड से भी है। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने मेथेनॉल नेटवर्क की पूरी जांच और मृतकों के परिजनों को 25 लाख रुपये मुआवजे की मांग की है।