इंटरनेट मीडिया का बढ़ता उपयोग किशोरों और युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर रहा है। इसके एल्गोरिदम लगातार एक जैसा कंटेंट परोस रहे हैं, जिससे उनमें बेचैनी, उदासी और चिड़चिड़ापन जैसी मानसिक समस्याएं बढ़ रही हैं। मनोचिकित्सकों के पास ऐसे मरीजों की संख्या में वृद्धि हुई है। बच्चों में अश्लील कंटेंट से ओसीडी और आक्रामक कंटेंट से आक्रामकता जैसी शिकायतें भी सामने आ रही हैं। विशेषज्ञ अभिभावकों को बच्चों के कंटेंट पर ध्यान देने और उनसे खुलकर बात करने की सलाह दे रहे हैं, ताकि समस्याओं का समय रहते समाधान हो सके।
इंदौर में एडीसीपी क्राइम राजेश दंडोतिया ने साइबर ठगी से बचाव के लिए जागरूकता और सतर्कता को सबसे बड़ा हथियार बताया। उन्होंने ‘हेलो नईदुनिया’ कार्यक्रम में पाठकों का मार्गदर्शन करते हुए कहा कि साइबर अपराध जानकारी के अभाव और लोगों के लालच, डर व लापरवाही के कारण बढ़ते हैं। दंडोतिया ने निवेश (74%) और डिजिटल अरेस्ट (9%) के नाम पर होने वाली ठगी के तरीकों पर प्रकाश डाला और इनसे बचने के लिए विस्तृत सलाह दी, जिसमें अनजान लिंक्स से बचना और बच्चों के मोबाइल फोन के उपयोग पर सावधानी बरतना शामिल है।