इसरो के हजारों कर्मचारियों ने निजी कंपनियों की बढ़ती भागीदारी की नीति पर चिंता व्यक्त की है। नौ कर्मचारी संगठनों ने 4 सितंबर को इसरो चेयरमैन वी. नारायणन को पत्र लिखकर निजीकरण नीति, इसरो की भविष्य की भूमिका और कर्मचारियों पर इसके असर की आधिकारिक जानकारी मांगी है। यह चिंता IN-SPACe अध्यक्ष पवन कुमार गोयनका के बयान के बाद बढ़ी, जिसमें उन्होंने कहा था कि भविष्य में इसरो प्रक्षेपण यान नहीं बनाएगा। कर्मचारी संगठनों ने स्पष्ट किया कि वे निजी भागीदारी के खिलाफ नहीं हैं, बल्कि निजीकरण की सीमा और इसरो की मुख्य जिम्मेदारियों पर स्पष्टता चाहते हैं।
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के 2001 से 2020 तक के बारिश के आंकड़ों के विश्लेषण से मानसून के समय और मात्रा में महत्वपूर्ण बदलाव सामने आए हैं। गंगा के मैदानी इलाकों में बारिश का चरम समय पहले हो गया है, जबकि मध्य भारत में यह आगे खिसक गया है। वर्ष 2011-20 के दौरान पश्चिम-मध्य भारत में औसत बारिश लगभग दो मिलीमीटर प्रतिदिन बढ़ी, वहीं पूर्वी भारत में लगभग एक मिलीमीटर प्रतिदिन की कमी दर्ज हुई। वैज्ञानिकों ने इन बदलावों के संभावित कारणों में एयरोसोल के प्रभाव को भी देखा है, जो बादलों के बनने की प्रक्रिया को प्रभावित कर सकते हैं।