उज्जैन की अशोककालीन वैश्य टेकरी में लगभग 90 साल बाद इतिहास की परतें खोलने की तैयारी है। मौलाना आजाद राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (मैनिट) बिना खोदाई किए रडार के माध्यम से जमीन में 50 फीट नीचे तक मौजूद ठोस संरचनाओं का पता लगाएगा। इसे सांची के स्तूप से भी बड़ा माना जाता है और सम्राट अशोक ने अपनी पत्नी देवी की याद में बनवाया था। ब्रिटिश काल में 1938 में शुरू हुई खोदाई गैस रिसाव के कारण रुक गई थी। अब भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने संरक्षण और खोदाई का प्रस्ताव भेजा है, जिसके बाद राज्य सरकार इसे बुद्ध लोक के रूप में विकसित करने की योजना बना रही है।