मध्य प्रदेश में पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों द्वारा इंटरनेट मीडिया पर वर्दी में डाली जा रही पोस्ट सिविल सेवा आचरण संहिता का उल्लंघन कर रही हैं। डीजीपी कैलाश मकवाणा की नसीहत के बावजूद निगरानी तंत्र के अभाव में इस पर रोक नहीं लग पा रही है। नेहा पच्चीसिया, अंकिता मिश्रा और विवेकानंद तिवारी जैसे कई मामले सामने आए हैं जिन पर कार्रवाई भी हुई है। उत्तर प्रदेश सहित कई राज्यों ने सोशल मीडिया पॉलिसी बनाई है, जबकि अन्य राज्यों ने सख्ती से इस पर रोक लगाई है। पुलिस मुख्यालय के अनुसार, पुलिस की छवि धूमिल होने पर ही कार्रवाई की जाती है।
मध्य प्रदेश में तीन महिलाएं, निलंबित सीएसपी नेहा पच्चीसिया, तृप्ति सिंह राजपूत और श्वेता जैन, अलग-अलग गंभीर आरोपों के चलते सुर्खियों में हैं। नेहा पर ट्रांसपोर्टर से अवैध वसूली का आरोप है, जिसकी जांच के लिए एसआईटी गठित की गई है। वहीं, तृप्ति सिंह राजपूत को फर्जी आईएएस अधिकारी बनकर सरकारी नौकरी और संपत्ति दिलाने के नाम पर लाखों की ठगी के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। तीसरी महिला, श्वेता जैन, चर्चित हनीट्रैप मामले की कथित सरगना हैं, जिन पर जेल से बाहर आकर नया गिरोह बनाने और रसूखदार लोगों को निशाना बनाने की साजिश रचने का आरोप है। इन तीनों मामलों की जांच जारी है।
कटनी के जिला न्यायालय ने कुठला थाना क्षेत्र के एक बहुचर्चित मामले में निलंबित सीएसपी नेहा पच्चीसिया सहित सहयोगी क्षितिज राज और मारूफ अहमद के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किए हैं। न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी मनीषा जैन तिवारी की अदालत ने 25 सितंबर तक गिरफ्तारी के आदेश दिए हैं। इन पर भ्रष्टाचार, हत्या के आरोपितों को बचाने की साजिश और करोड़ों की जमीन को कम दाम में हड़पने का आरोप है। तीनों की अग्रिम जमानत अर्जी खारिज हो चुकी है। उच्च न्यायालय की जबलपुर पीठ में भी मामला विचाराधीन है।