इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पेयजल मामले की आयोग जांच में खुलासा हुआ कि नगर निगम में फाइल मंजूरी में 859 दिन का अत्यधिक समय लगा। इस दौरान मेयर कार्यालय में 66 दिन और महापौर परिषद कार्यालय में चार माह तक फाइल अटकी रही, जबकि लोग लगातार बीमार पड़ रहे थे। रिपोर्ट में अधिकारियों को दोषी पाया गया और जनप्रतिनिधियों को भी क्लीन चिट नहीं मिली। ढाई करोड़ रुपये की नई लाइन बिछाने का प्रस्ताव दो साल से अधिक समय तक लंबित रहा, जिसे क्षेत्रीय पार्षद की निष्क्रियता और ड्रेनेज लाइन घोटाले के बाद बढ़ी सतर्कता से जोड़ा गया है।