मध्य प्रदेश के सीहोर जिले में एक बांग्लादेशी नागरिक इरशाद को बिना वैध दस्तावेज के अवैध रूप से भारत में रहने के आरोप में जिला सत्र न्यायालय ने सात साल के सश्रम कारावास और 10 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। 44 वर्षीय इरशाद को 27 अप्रैल 2025 को सीहोर में पकड़ा गया था। वह 29 साल पहले 15 वर्ष की आयु में बांग्लादेश से भारत आया था और अजमेर तथा सीहोर में रहा। उसने स्वयं को भारतीय नागरिक दर्शाने के लिए आधार कार्ड और पैन कार्ड भी बनवा लिए थे।
ग्वालियर पुलिस ने बहोड़ापुर इलाके में अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशी नागरिकों को पुलिस लाइन स्थित डिटेंशन सेंटर भेज दिया है। पूछताछ में पता चला कि ये लोग असम के रास्ते भारत में दाखिल हुए थे और फर्जी दस्तावेज बनवाकर अपनी पहचान छिपाकर ग्वालियर में रह रहे थे। सीएसपी नागेंद्र सिंह सिकरवार ने बताया कि बगैर नागरिकता के रह रहे इन व्यक्तियों के खिलाफ किसी आपराधिक प्रकरण की जांच के लिए रेडियो मैसेज कराया गया है। आपराधिक रिकॉर्ड की जांच के बाद, यदि कोई मामला नहीं पाया जाता है, तो बीएसएफ की सहायता से इन्हें डिपोर्ट करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।