बाणसागर बांध का जलस्तर पूर्ण भराव के करीब पहुंचने के बाद सोमवार से इसके आठ रेडियल गेट खोलकर सोन नदी में पानी छोड़ा जा रहा है। 1 सितंबर को सुबह 8 बजे तक बांध 98.42 प्रतिशत तक भर चुका था, जिसका जलस्तर 341.58 मीटर दर्ज किया गया। बांध से कुल 3458.84 क्यूमेक पानी की निकासी की जा रही है, जिसमें स्पिलवे के माध्यम से 3277 क्यूमेक पानी सोन नदी में छोड़ा जा रहा है। निचले क्षेत्रों में जलस्तर बढ़ने की संभावना के मद्देनजर प्रशासन ने नदी किनारे बसे गांवों के लोगों से सतर्क रहने की अपील की है।
ग्वालियर में कम बारिश के कारण गर्मी में जल संकट की आशंका के मद्देनजर, जल संसाधन विभाग ने अपर ककैटो, ककैटो और पेही बांधों से पानी तिघरा बांध में स्थानांतरित करने की कवायद शुरू की है। इस कदम से तिघरा में लगभग दो महीने के अतिरिक्त पानी की व्यवस्था हो सकेगी, जिससे शहर की आगामी पेयजल जरूरतों को पूरा करने में मदद मिलेगी। हालांकि, बांध को पूरी क्षमता तक भरने के लिए अच्छी बारिश अभी भी आवश्यक है। विभाग जून 2024 जैसी स्थिति से बचने के लिए योजना बना रहा है।
ग्वालियर में रविवार को हुई झमाझम वर्षा से शहर और गांवों में जलभराव की स्थिति बनी। पिछले तीन दिन की वर्षा से जिले की नदियां उफान पर हैं और पही, ककेटा तथा तिघरा बांध लबालब भर गए, जिससे शहर का जल संकट हल हो गया। प्रशासन ने नदियों के किनारे बसे गांवों को बांधों से पानी छोड़े जाने की संभावना पर अलर्ट किया है। मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार, निम्न दाब का क्षेत्र अब आगरा की ओर खिसक गया है, जिससे आगामी चार दिनों तक हल्की से मध्यम वर्षा की संभावना है। वर्षा से तापमान सामान्य से पांच डिग्री सेल्सियस कम हुआ है और खरीफ व रबी फसलों को लाभ मिला है।
शहडोल जिले में मूसलाधार बारिश के कारण बाणसागर बांध के कैचमेंट एरिया में जल आवक तेजी से बढ़ी है। पूर्ण भराव जलस्तर बनाए रखने के लिए 26 सितंबर को सुबह 11:30 बजे बांध से जल निकासी में वृद्धि की गई। पहले से खुले 8 रेडियल गेटों की ओपनिंग 2.00 मीटर से बढ़ाकर 3.00 मीटर की गई, जबकि 4 नए गेट भी 3.00 मीटर तक खोले गए। कुल 12 रेडियल गेटों से स्पिलवे के माध्यम से 7243 क्यूमेक्स जल का डिस्चार्ज हो रहा है, जिससे सोन नदी में कुल प्रवाह 7417.23 क्यूमेक्स हो गया है।
खरगोन जिले में मानसून के दौरान औसत से 10 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है, फिर भी छोटे और बड़े जलाशयों में 87 प्रतिशत जलभराव है। देजला देवाड़ा, अपरवेदा और साटक बांध पिछले एक महीने से ओवरफ्लो हो रहे हैं, जिससे सिंचाई और पेयजल में राहत मिली है। भू-अभिलेख विभाग के अनुसार, इस सीजन में 759.46 मिमी बारिश हुई है। कृषि विभाग ने रबी सीजन के लिए 3.77 लाख हेक्टेयर में बुवाई का लक्ष्य रखा है, जिसमें गेहूं की बुवाई में कमी और चने के क्षेत्रफल में वृद्धि का अनुमान है। हालांकि, गर्मी में पहाड़ी इलाकों में पेयजल संकट की आशंका है।