जबलपुर हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण आदेश में स्पष्ट किया है कि लंबित मामलों के निपटारे में देरी का कारण केवल अनावश्यक स्थगन ही नहीं है, बल्कि न्यायाधीशों, न्यायालय कक्षों, आधारभूत सुविधाओं और मंत्रालयीन कर्मचारियों की कमी भी इसमें प्रमुख भूमिका निभाती है। वरिष्ठ अधिवक्ता अशोक लालवानी ने अनावश्यक स्थगन और बेबुनियाद मुकदमों पर रोक लगाने के लिए दिशा-निर्देशों की मांग की थी। हाई कोर्ट ने कहा कि प्रत्येक मामले की परिस्थितियां भिन्न होती हैं, इसलिए स्थगन या अंतरिम आवेदनों के लिए कोई निश्चित नियम नहीं बन सकता।