भोपाल में रहवासी क्षेत्रों में व्यावसायिक गतिविधियों के खिलाफ नगर निगम की सीलिंग कार्रवाई कानूनी पेच में फंस गई है। सुप्रीम कोर्ट की सख्ती और संभावित अवमानना कार्रवाई के बीच अपर मुख्य सचिव संजय दुबे और नगर निगम आयुक्त संस्कृति जैन सॉलिसिटर जनरल से मुलाकात करने दिल्ली पहुंचे। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में पेश किए जाने वाले दस्तावेजों और कानूनी राह पर चर्चा की। व्यापारियों के विरोध के कारण कार्रवाई की रफ्तार धीमी पड़ी है। निगम को 15 सितंबर तक अनुपालन रिपोर्ट पेश करनी है, जबकि व्यापारी मास्टर प्लान और नियमितीकरण जैसे विकल्पों से समाधान मांग रहे हैं।
भोपाल मास्टर प्लान 2047 के नए ड्राफ्ट में आवासीय क्षेत्रों में चल रही अवैध व्यावसायिक गतिविधियों को शर्तों के साथ नियमित करने का प्रस्ताव है। धारा 15.38.1 के तहत, मास्टर प्लान प्रारूप के प्रकाशन से पहले से संचालित, व्यावसायिक दर पर संपत्ति कर जमा करने वाले और कमर्शियल बिजली कनेक्शन वाले प्रतिष्ठानों को वैध किया जा सकेगा। यह 1995 के मास्टर प्लान के विपरीत है, जिसमें ऐसी गतिविधियों को स्थानांतरित करने का प्रावधान था। विशेषज्ञों ने सुप्रीम कोर्ट के सख्त रुख के बावजूद इस प्रस्ताव पर सवाल उठाए हैं, खासकर अनधिकृत कॉलोनियों और प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों को छूट नहीं मिलेगी।
भोपाल मास्टर प्लान-2047 के ड्राफ्ट में मेट्रो स्टेशनों के आसपास के 500 मीटर क्षेत्र को विशेष विकास क्षेत्र के रूप में विकसित करने का प्रस्ताव है। इस योजना के तहत बहुमंजिला दफ्तर, घर, दुकानें और अन्य आवश्यक सुविधाएं एक ही क्षेत्र में विकसित की जाएंगी, जिससे लोगों को रोजमर्रा के कार्यों के लिए दूर नहीं जाना पड़ेगा। इसमें पुराने निर्माणों का पुनर्विकास, ऊंची इमारतों का निर्माण और मिश्रित उपयोग की अनुमति जैसे प्रावधान शामिल हैं। हालांकि, विशेषज्ञों ने घने इलाकों में बुनियादी ढांचे पर बढ़ते दबाव और शहर की पहचान खोने की चुनौती पर चिंता व्यक्त की है।
भोपाल मास्टर प्लान 2047 के ड्राफ्ट में 27% हरित क्षेत्र का दावा विशेषज्ञों द्वारा कागजी बताया जा रहा है। कुल 1,01,690 हेक्टेयर योजना क्षेत्र में वास्तविक हरित क्षेत्र केवल 16.22% है, जबकि दावा 61,017 हेक्टेयर के दायरे पर आधारित है। आम नागरिकों के लिए पार्क (G-1) महज 0.66% (670.93 हेक्टेयर) हैं, जिससे प्रति व्यक्ति केवल 1.5 वर्ग मीटर खुला स्थान उपलब्ध है। इसमें मौजूदा वन भूमि और बफर जोन को भी हरित क्षेत्र में जोड़ा गया है।
मध्य प्रदेश सरकार शहरों के सुनियोजित विकास हेतु मेट्रोपालिटन रीजन पर कार्य कर रही है, जिसमें भोपाल, इंदौर, ग्वालियर और जबलपुर जैसे बड़े शहर शामिल हैं। भोपाल में गिफ्ट सिटी प्रस्तावित है, जिसके लिए भेल से जमीन वापसी की कवायद चल रही है। भोपाल, इंदौर-उज्जैन मेट्रोपालिटन क्षेत्र निर्धारित हो चुके हैं, जिनके लिए 15 वर्षीय विकास एवं निवेश योजना बनेगी। नगरीय विकास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने मास्टर प्लान तैयार होने और मुख्यमंत्री को भेजे जाने की जानकारी दी। उन्होंने आवासीय क्षेत्रों में व्यावसायिक उपयोग पर सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के पालन हेतु विधिक समाधान खोजने की बात कही।
भोपाल बीते 21 सालों से बिना मास्टर प्लान के अनियोजित ढंग से बढ़ रहा है, जिससे नागरिक ट्रैफिक जाम और अव्यवस्थित कॉलोनियों जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं। शहर के लिए तीन बार मास्टर प्लान के ड्राफ्ट तैयार किए गए, लेकिन राजनीतिक खींचतान, बिल्डर सिंडिकेट और रसूखदारों की मिलीभगत के कारण कोई भी अंतिम रूप नहीं ले सका। 1995-2005 के प्रभावी प्लान की 34 में से 22 सड़कें भी नहीं बनीं। वर्तमान में 2031 का ड्राफ्ट 2020 से लंबित है, जबकि 2047 के लिए सर्वे जारी है। इससे शहर के सुनियोजित विकास में बाधा आ रही है।
सर्वोच्च न्यायालय ने भोपाल के रिहायशी इलाकों में बिना अनुमति चल रही व्यावसायिक गतिविधियों पर पूर्ण रोक लगा दी है। न्यायालय ने राज्य सरकार द्वारा मुख्यमंत्री स्तर पर गठित 10 सदस्यीय समीक्षा समिति को भंग कर दिया और मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय द्वारा दुकान संचालकों को दी गई राहत (स्टे ऑर्डर) को भी निरस्त कर दिया। नगर निगम की रिपोर्ट में 100 दुकानों को सील करने के दावे के मुकाबले केवल दो दुकानें सील होने का खुलासा होने पर न्यायालय ने फटकार लगाई। भोपाल नगर निगम को वास्तविक स्थिति सुधारने के लिए पांच सप्ताह का समय दिया गया है। अगली सुनवाई 15 सितंबर को होगी।
इंदौर में मेट्रो के 31.32 किलोमीटर रूट के आसपास 500-500 मीटर में ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट (टीओडी) कॉरिडोर विकसित करने की योजना प्रस्तावित है। इस हाई डेंसिटी डेवलपमेंट में मेट्रो स्टेशन के 500 मीटर क्षेत्र में हाईराइज इमारतें बनेंगी, जिससे आवासीय और व्यावसायिक उपयोग बढ़ेगा। पहले चरण में एयरपोर्ट-गांधी नगर, आईएसबीटी-चंद्रगुप्त चौराहा, राजवाड़ा-रीगल और एससी 4-एससी 3 मेट्रो स्टेशन को मिलाकर चार क्लस्टर बनेंगे। इंस्टीट्यूट ऑफ टाउन प्लानर्स, इंडिया (आईटीपीआई) द्वारा आयोजित संवाद कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने टीओडी के क्रियान्वयन पर चर्चा की।