सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात में 2017 के ट्रेन हादसे में मृतक के माता-पिता को आठ लाख रुपये का मुआवजा बहाल कर दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि मृत यात्री से टिकट बरामद न होने मात्र से मुआवजे का दावा समाप्त नहीं किया जा सकता। न्यायमूर्ति उज्जल भुइयां और ए.एस. चंदुरकर की पीठ ने गुजरात हाईकोर्ट के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसने मुआवजे को खारिज कर दिया था। शीर्ष अदालत ने कहा कि पिता के शपथ पर दिए बयान और एक महीने से अधिक समय तक अस्पताल में इलाज जैसे तथ्यों से यात्री के वास्तविक होने की पुष्टि होती है। यह राशि मृतक के माता-पिता को 30 दिनों के भीतर दी जाए।