उज्जैन के प्राचीन खड़े हनुमान मंदिर के विस्थापन मामले में आईआईटी इंदौर ने स्पष्ट किया है कि उसने प्रतिमा की स्कैनिंग के लिए कोई टीम नहीं भेजी है और न ही उसके पास मूर्तियों के विस्थापन संबंधी विशेषज्ञ हैं। प्रशासन ने कहा है कि अंतिम निर्णय वैज्ञानिक परीक्षण रिपोर्ट के बाद होगा। मंदिर को सिंहस्थ 2028 की तैयारियों के तहत सड़क चौड़ीकरण के कारण विस्थापित किया जा रहा है। स्थानीय लोगों और हिंदूवादी संगठनों ने इसका विरोध किया है। प्रशासन ने जबरन हटाने के दावों को भ्रामक बताया है और कहा है कि प्रतिमा के आधार, गहराई और मजबूती का वैज्ञानिक परीक्षण किया जाएगा।