उच्च न्यायालय की ग्वालियर खंडपीठ ने ओबीसी प्रमाणपत्र से जुड़े एक मामले में महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। कोर्ट ने कहा कि क्रीमीलेयर का निर्धारण केवल माता-पिता के वेतन के आधार पर नहीं किया जा सकता, बल्कि उनकी सेवा स्थिति, पद की श्रेणी, पदोन्नति की तारीख और आय के स्वरूप सहित अन्य निर्धारित मापदंडों की जांच भी आवश्यक है। आवेदिका रागिनी राठौर के मामले में, न्यायालय ने पूर्व में पारित दो आदेश रद्द कर दिए और प्रकरण को नए सिरे से निर्णय के लिए सक्षम अधिकारी के पास भेज दिया है। सक्षम अधिकारी को छह सप्ताह में कारणयुक्त आदेश पारित करने का निर्देश दिया गया है।