इंदौर के निकट स्थित प्राशर आश्रम सावन माह में पर्यटकों और श्रद्धालुओं की पहली पसंद बना हुआ है। यह स्थान धार्मिक आस्था और शिव भक्ति का केंद्र होने के साथ-साथ अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए भी जाना जाता है। हरी-भरी पहाड़ियों से घिरी प्राशर झील और प्राचीन शिव मंदिर यहां आने वाले हर पर्यटक को आकर्षित करते हैं। सावन में यहां विशेष मेले का आयोजन हो रहा है, जिसमें प्रतिदिन हजारों लोग पहुंच रहे हैं। यह पारिवारिक भ्रमण और पिकनिक के लिए एक उत्तम स्थल है, जो शहर की भागदौड़ से दूर शांत वातावरण प्रदान करता है।
इंदौर के बावड़ी वाले बालाजी मंदिर द्वारा रामेश्वरम से इंदौर तक 2100 किलोमीटर की सबसे लंबी डाक कांवड़ यात्रा का आयोजन किया जा रहा है। इसमें 300 कांवड़ यात्री शामिल होंगे, जो 15 अगस्त से शुरू होकर 21 अगस्त तक इंदौर पहुंचने की संभावना है। यह यात्रा 171 घंटे में पूरी होगी, जिसकी गति 12 किलोमीटर प्रति घंटा रहेगी। मंदिर के महंत रामजी महाराज इस यात्रा के प्रेरणा स्रोत हैं, जिसका सिलसिला 2015 से चला आ रहा है।
भिंड जिले के प्राचीन वनखंडेश्वर मंदिर से निकलीं महिला श्रद्धालु वंदना राठौर 11 किलोग्राम वजनी शिव प्रतिमा कंधे पर लेकर इंदौर पहुंचीं। उन्होंने 17 जून को भिंड से यह पदयात्रा शुरू की थी, जिसका लक्ष्य 70 दिन में 700 किलोमीटर की दूरी तय करना है। मुरैना निवासी नितिन शर्मा भी उनके साथ हैं। दोनों श्रद्धालु उज्जैन में बाबा महाकाल और बाद में ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन करेंगे। वंदना प्रतिदिन 10 से 23 किलोमीटर पैदल चलती हैं, और उनकी यात्रा 70 दिनों में संपन्न होगी।