इंदौर के 37 वर्षीय जितेंद्र कुमार की दोनों किडनी पेनकिलर के सेवन से खराब हो गईं, जिसके बाद वे पिछले चार साल से डायलिसिस पर हैं। शारीरिक कमजोरी के कारण नौकरी छोड़ने के बाद उन्होंने स्वयं का व्यवसाय शुरू करने का निर्णय लिया। रेडक्रॉस से ₹20,000 की सहायता से उन्होंने फल का ठेला खरीदा, लेकिन बीमारी के चलते डेढ़ महीने अस्पताल में रहे। बाद में महाकाल संस्था के जय्यु जोशी और करीम खान ने ₹10,000 की मदद की, जिससे जितेंद्र ने फिर से फल का ठेला लगाना शुरू किया। वे परिवार की जिम्मेदारी उठाने के लिए दृढ़ संकल्पित हैं।
इंदौर में दोस्तों ने मुश्किल वक्त में एक-दूसरे का साथ देकर दोस्ती की नई मिसालें पेश की हैं। आदित्य शर्मा का स्टार्टअप घाटे में जाने पर बचपन के दोस्त राहुल वर्मा ने पीएफ से पैसे निकालकर मदद की। मनीष ठाकुर की इंजीनियरिंग फीस संदीप चौहान ने भरी, जब उनके परिवार की आर्थिक स्थिति खराब हुई। निखिल जैन और विवेक मोदी ने अपनी नौकरी छोड़कर साथ में स्टार्टअप शुरू किया और दस साल से सफल हैं। वहीं, नेहा यादव और पूजा सोनी ने कॉलेज के बाद एक एनजीओ की शुरुआत कर जरूरतमंदों की मदद की है, जो सात वर्षों से जारी है।