आवास छोड़कर भागे श्रीलंका के राष्ट्रपति,प्रदर्शनकारियों ने प्रेसिडेंट हाउस पर किया कब्जा

  • राष्ट्रपति गोटाबाया राजपक्षे के देश छोड़ने की अटकलें
  • आर्थिक संकट के कारण हो रहा उग्र प्रदर्शन

बुलंदसोच न्यूज़,डेस्क रिपोर्ट।

आर्थिक संकट को लेकर श्रीलंका (srilanka-country in South Asia) में जारी प्रदर्शन के बीच आंदोलनकारियों ने राष्ट्रपति गोटाबाया राजपक्षे(president gotabaya rajapaksa) के सरकारी आवास पर कब्जा कर लिया है।श्रीलंका (srilanka-country in South Asia) में राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे के खिलाफ लंबे वक्त से ‘Gota Go Gama’ और ‘Gota Go Home’ आंदोलन जारी है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अटकलें लगाई जा रही हैं कि राष्ट्रपति राजपक्षे ने देश छोड़ दिया है।

प्रदर्शनकारियों ने सत्ता छोड़ने के लिए किया मजबूर

सिंहली भाषा में गामा का मतलब गांव होता है। प्रदर्शनकारी एक जगह जमा होकर तंबू लगाते हैं और गाड़ियों के हार्न बजाते हुए राष्ट्रपति और सरकार के खिलाफ गोटा-गो-गामा का नारा बुलंद करते हैं। इनका मकसद राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे को सत्ता छोड़ने के लिए मजबूर करना था।

ईंधन की कमी से जूझ रहा श्रीलंका

श्रीलंका (srilanka-country in South Asia) में आम लोगों की रोज पुलिस, आर्मी और एयरफोर्स के साथ झड़पें हो रही हैं, क्योंकि यहीं पेट्रोल पंप की निगरानी कर रहे हैं। समाज में उग्रता अप्रत्याशित तौर पर बढ़ी है, जो दंगों के रूप में उभर जाती है। स्कूल-कॉलेज, अस्पताल बंद पड़े हैं। लिहाजा युवक घर पर अपने परिवार को बेबस जूझते हुए देखने पर मजबूर हैं।

गैस की कमी से लोग घरों में लकड़ी का चूल्हा जलाने को मजबूर
केमिकल फर्टिलाइजर पर बैन के चलते देश में खाद्य संकट पैदा हो गया है। गैस की कमी के कारण लोग घरों में चूल्हा जला रहे हैं। श्रीलंका के मध्यमवर्गीय परिवारों ने भी अपने भोजन की खपत को कम कर दिया है, क्योंकि वे इतनी महंगी खाद्य सामग्री लेने से कतरा रहे हैं।

मई में जो महंगाई 39.1% थी, वो जून में बढ़कर 54.6% हो गई है। अगर सिर्फ खाद्य महंगाई को देखें तो मई में जो 57.4% थी, वो जून में बढ़कर 80.1% हो गई है।

विदेशी मुद्रा भंडार लगभग खत्म

श्रीलंका में लोगों को रोजमर्रा से जुड़ी चीजें भी नहीं मिल पा रही हैं या कई गुना महंगी मिल रही हैं। विदेशी मुद्रा भंडार लगभग खत्म हो चुका है, जिससे वो जरूरी चीजों का भी आयात नहीं कर पा रहा है। सबसे ज्यादा ईंधन की कमी है। पेट्रोल-डीजल पर कई किलोमीटर लंबी लाइनें हैं। विरोध प्रदर्शन भी हो रहे हैं।