रीवा के जिला शिक्षा अधिकारी(DEO) समेत प्राचार्यों ने खरीदी में कर दिया लाखों का खेल,कलेक्टर की जांच में हुआ खुलासा।

पेड़ की कटाई का 30 हजार तो 330 की सीमेंट का 425 रुपये कर दिया, खरीदी मे हुए है एसे लाखो के खेल

भुगतानबुलंदसोच न्यूज़,30 दिसम्बर 2021 रीवा।

रीवा जिले का शिक्षा विभाग (Education Department Rewa)हमेशा से सुर्खियों में रहा है। यहां के शिक्षा अधिकारियों के धोटाले और कारनामे प्रदेश के अन्य अधिकारियों को घोटाले करने की प्रेरणा देते हैं। दरअसल रीवा जिले के शिक्षा अधिकारी(Rewa DEO) का ऐसा कारनामा सामने आया है,जिसमे वे शहर के इकलौते उत्कृष्ट उच्चतर माध्यमिक विद्यालय मार्तंड क्रमांक 1 में प्राचार्य रहते हुए 330 की सीमेंट को 425 रुपये में खरीद कर कीर्तिमान स्थापित कर दिया।यही नहीं उत्कृष्ट विद्यालय में अन्य प्राचार्यों के कारगुजारी के किस्से सुनकर आप हतप्रभ रह जाएंगे। एक प्राचार्य ने तो 1 पेड़ की कटाई के तीस हजार भुगतान कर दिया। मजे की बात तो यह है कि रीवा कलेक्टर ने इस पूरे मामले की जांच जिला कोषालय अधिकारी से कराई और उनकी जांच में वितीय अनियमितता पाई गई। लेकिन ऐसे अधिकारियों पर कार्यवाही की बजाय इनसे जवाब मांगा जा रहा है। सवाल है कि जब जिले का जिला शिक्षा आधीकरि (Rewa DEO) ही वित्तीय अनियमितता कर रहा है,तो उसके पद में बने रहते हुए उस पर कार्यवाही कैसे होगी। सूत्रों की मानें तो वर्ष 2019 से अगस्त 21 तक के कार्यकाल में पदस्थ रहें सभी प्राचार्यो ने उत्कृष्ट विद्यालय में खूब धन बटोरा।

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पूर्व प्राचार्यों ने भी जमकर की लूट खसोट

विद्यालय में पूर्व पदस्थ प्राचार्यों के कार्यकाल में वित्तीय अनियमितता की शिकायत जिला कलेक्टर के पास पहुंची तो उन्होंने जिला कोषालय अधिकारी रीवा को वित्तीय संबंध में जांच अधिकारी नियुक्त किया। कोषालय अधिकारी द्वारा दिए गए जांच प्रतिवेदन के आधार पर 26-07-12 से 28-08 2021 तक रहे कुल 4 प्राचार्यो ने जमकर शासकीय राशि का बंदरबांट किया। वित्तीय अनियमितता में वर्तमान जिला शिक्षा अधिकारी गंगा प्रसाद उपाध्याय समेत प्राचार्य सुरेश प्रसाद सोनी, व्ही.पी. खरे, रामानंद पीड़िहा शामिल हैं।

चारों तत्कालीन प्राचार्यो की है अनियमित भुगतान

जांच में चारों तत्कालीन प्राचार्यो की भूमिका पाई गई है । रामानंद पिडिहा 26 जुलाई 2012 से 28 फरवरी 2019 तक प्राचार्य रहे । इन्होंने आठ लाख रुपए से अधिक का भुगतान स्कुल परिसर की साजसज्जा एवं बिज़ली उपकरण खरीदने के नाम पर व्यय किया, जिसमें अनियमितता पाई गई है । करीब 5 लाख रुपयों की रिकवरी प्रस्तावित है । सुरेश प्रसाद सोनी 1 मार्च 2019 से 15 अक्तूबर 2019 तक रहे । उन्होने 97 हजार रुपए का अनियमित भुगतान किया । वीपी खरे पर 3 लाख रुपए की रिकवरी है ।

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