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2026-10-17

सिरमौर में ‘भरोसा’ सेवा समिति का ‘जुगनू अभियान’ गरीब बच्चों को दे रहा निःशुल्क शिक्षा

bulandsochnews Senior News Reporter

बुलंद सोच, रीवा।

रीवा जिले के सिरमौर ब्लॉक में भरोसा सेवा समिति का ‘जुगनू अभियान’ शिक्षा की नई रोशनी फैला रहा है। आर्थिक तंगी के कारण पढ़ाई से दूर हो रहे बच्चों के लिए अब उन्हीं के गांवों में शाम को कोचिंग की घंटी बज रही है। भरोसा सेवा समिति सिरमौर द्वारा पिछले एक वर्ष से पांच गांवों में निःशुल्क कोचिंग केंद्र संचालित किए जा रहे हैं, जिन्हें ‘भरोसे की पाठशाला’ कहा जा रहा है।

बच्चों ने दिया 'जुगनू कोचिंग सेंटर' नाम

समिति के अध्यक्ष रजनीश कुशवाहा ने बताया कि उनका उद्देश्य केवल बच्चों को परीक्षा में पास कराना नहीं, बल्कि उनमें सीखने का भरोसा जगाना है। समिति सिरमौर नगर, पड़री, खैरहन, सुरवार और दुलहरा में केंद्र चला रही है। बच्चों और शिक्षकों के बीच आत्मीय संबंध के कारण बच्चों ने स्वयं अपने केंद्रों का नाम ‘जुगनू कोचिंग सेंटर’ रखा है। समिति का दर्शन है कि जैसे घने अंधेरे में जुगनू अपनी छोटी सी रोशनी से उजाला करता है, वैसे ही वे इन जरूरतमंद बच्चों के जीवन में शिक्षा की रोशनी पहुंचाना चाहते हैं।

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किताब के साथ संस्कारों की भी पढ़ाई

इन केंद्रों में पढ़ाई का तरीका पारंपरिक नहीं है। बच्चों को गणित, विज्ञान, हिंदी, अंग्रेजी के साथ-साथ सामान्य ज्ञान, व्यावहारिक ज्ञान और जीवनोपयोगी बातें भी सिखाई जाती हैं। प्रतिदिन 15 मिनट नैतिक शिक्षा के लिए समर्पित होते हैं, जहां ईमानदारी, अनुशासन, बड़ों का सम्मान, छोटों से प्यार, सहयोग, स्वच्छता और सामाजिक जिम्मेदारी जैसे संस्कारों पर चर्चा होती है। समिति का मानना है कि अच्छे अंक प्राप्त करने से अधिक महत्वपूर्ण अच्छा इंसान बनना है। इन केंद्रों में पढ़ने वाले अधिकांश बच्चे मजदूर, किसान और दिहाड़ी परिवारों से आते हैं, जो महंगी कोचिंग का खर्च वहन नहीं कर सकते थे। अब शाम होते ही ये बच्चे बस्ते लेकर ‘जुगनू सेंटर’ पहुंचते हैं और देर तक पढ़ाई करते हैं।

समाज से सहयोग की अपील

भरोसा सेवा समिति ने इस अभियान को आगे बढ़ाने के लिए समाज से सहयोग की अपील की है। समिति का कहना है कि मदद केवल पैसे से ही नहीं होती। पुरानी किताब, कॉपी-पेन, एक घंटे का समय देकर पढ़ाकर, या अपने जीवन के अनुभव साझा करके भी किसी बच्चे का भविष्य बदला जा सकता है। समिति का संदेश है कि पांच गांवों से शुरू हुई यह छोटी सी रोशनी पूरे सिरमौर को रोशन कर सकती है, जिसके लिए समाज के सहयोग की आवश्यकता है।