भोपाल जिले के 731 गांवों के वर्ष 1954 से अब तक के 72 साल पुराने जमीन रिकॉर्ड अगले तीन महीने में ऑनलाइन उपलब्ध कराए जाएंगे। खसरा, खतौनी और नामांतरण जैसे दस्तावेज भू-अभिलेख पोर्टल पर देखे और डाउनलोड किए जा सकेंगे। यह पहल पुराने राजस्व अभिलेखों के खराब होने और उन्हें प्राप्त करने में लगने वाले लंबे समय की समस्या का समाधान करेगी। जुलाई से शुरू हुए डिजिटलीकरण अभियान के तीसरे चरण में आठ लाख पेज स्कैन किए जाएंगे, जिसके बाद पटवारियों द्वारा ऑनलाइन सत्यापन होगा। यह प्रक्रिया नागरिकों और राजस्व अधिकारियों दोनों के लिए दस्तावेजों तक पहुंच को तेज और पारदर्शी बनाएगी।