बुलंद सोच, ग्वालियर।
मध्यप्रदेश हाई कोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने अशोकनगर कलेक्टर को लगभग तीन वर्ष से निलंबित एक शासकीय कर्मचारी के मामले में निलंबन की दोबारा समीक्षा करने का निर्देश दिया है।
अदालत ने कहा कि राज्य शासन के 28 जनवरी 2013 के परिपत्र के अनुसार, निलंबन की प्रत्येक छह माह में समीक्षा किया जाना आवश्यक है। इस संदर्भ में यह देखा जाए कि कर्मचारी को अब भी निलंबित रखना जरूरी है या नहीं।
हाई कोर्ट ने यह आदेश बृजेंद्र सिंह यादव की याचिका का निराकरण करते हुए पारित किया। याचिकाकर्ता की ओर से बताया गया कि उन्हें 5 अगस्त 2021 को उनके खिलाफ दर्ज एक आपराधिक मामले के कारण निलंबित किया गया था।
बाद में 3 जुलाई 2024 को भी निलंबन जारी रखने का आदेश पारित किया गया। याचिका में कहा गया कि आपराधिक मुकदमे की सुनवाई में अब तक कोई विशेष प्रगति नहीं हुई है और इसमें हो रही देरी के लिए याचिकाकर्ता जिम्मेदार नहीं हैं। इसलिए लगातार निलंबन में रखना उचित नहीं है।
वहीं, राज्य शासन की ओर से दलील दी गई कि याचिकाकर्ता पर फर्जी प्रमाणपत्रों के आधार पर सरकारी नौकरी प्राप्त करने का गंभीर आरोप है। ऐसे गंभीर आपराधिक मामले में सक्षम प्राधिकारी द्वारा निलंबन जारी रखने का निर्णय उचित है, इसलिए याचिका खारिज की जानी चाहिए।
सुनवाई के बाद हाई कोर्ट ने कहा कि किसी कर्मचारी को निलंबित रखना या निलंबन जारी रखना नियोक्ता का प्रशासनिक निर्णय है, लेकिन इसका समय-समय पर पुनर्विचार होना आवश्यक है।

