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हाई कोर्ट ने शिक्षकों की दो अग्रिम वेतनवृद्धि मामले में सरकार की पुनर्विचार याचिका खारिज की

हाई कोर्ट ने शिक्षकों को बीएड-डीएड योग्यता पर मिलने वाली दो अग्रिम वेतनवृद्धि के मामले में राज्य सरकार की पुनर्विचार याचिका खारिज कर दी है। न्यायमूर्ति विवेक जैन की एकलपीठ ने कहा कि सरकार मनमाने तरीके से कट-ऑफ तारीख तय कर समान वर्ग के कर्मचारियों के बीच भेदभाव नहीं कर सकती और न ही परिपत्र जारी कर उनके वैधानिक लाभ छीन सकती है। कोर्ट ने 16 जून 2025 के अपने मूल आदेश को बरकरार रखा।

इंदौर वार्ड 60 पार्षद सुनेहरा अंसाफ अंी का निर्वाचन शून्य घोषित करने वाले जिला कोर्ट के आदेश पर हाई कोर्ट की रोक, उपचुनाव भी स्थगित

मप्र हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने वार्ड 60 की पार्षद सुनेहरा अंसाफ अंी का निर्वाचन शून्य घोषित करने वाले जिला कोर्ट के 17 जुलाई 2026 के आदेश पर रोक लगा दी है। न्यायमूर्ति संदीप एन भट्ट ने निर्वाचन आयोग द्वारा उपचुनाव की घोषणा पर भी रोक लगाई। सुनेहरा अंी ने 2022 के नगर निगम चुनाव में लगभग पांच हजार मतों से जीत हासिल की थी, जिसे इफ्तेखार (मुन्ना) अंी ने गलत नो-ड्यूज प्रमाण पत्र प्रस्तुत करने और भ्रामक प्रचार के आरोपों के साथ चुनौती दी थी। हाई कोर्ट ने अंी के अंतरिम आवेदन को स्वीकार करते हुए कहा कि बिना व्यक्तिगत गलती के निर्वाचित प्रतिनिधि को हटाना मतदाताओं के साथ अन्याय है।

एमपी हाई कोर्ट से छतरपुर सीएमएचओ कर्मचारियों को अंतरिम राहत

जबलपुर। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने छतरपुर के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) कार्यालय में कार्यरत कर्मचारियों को आउटसोर्सिंग की कार्रवाई के बीच अंतरिम राहत प्रदान की है। न्यायमूर्ति विशाल धगट की एकलपीठ ने याचिकाकर्ताओं को फिलहाल सीएमएचओ कार्यालय में अपनी सेवाएं जारी रखने की अनुमति दी है। उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार सहित संबंधित पक्षों को चार सप्ताह में जवाब देने के लिए नोटिस जारी किया है। चंद्रभान सेन व अन्य की ओर से दायर याचिका में सेवाओं को आउटसोर्स किए जाने को चुनौती दी गई थी।

लक्ष्मीपुर बस्ती से 200-250 परिवारों को हटाने के मामले में हाई कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा

जबलपुर हाई कोर्ट ने एमआर-फोर से लगी लक्ष्मीपुर बस्ती से 200-250 परिवारों को हटाने के मामले में अपना आदेश सुरक्षित कर लिया है। कोर्ट ने नगर निगम, जबलपुर विकास प्राधिकरण, केसरवानी शिक्षा समिति और बस्ती के रहवासियों का पक्ष सुना। हस्तक्षेपकर्ताओं ने बताया कि 1990 में लगभग आठ हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण हुआ था और 1998 में कई परिवारों को 28 वर्ष की पट्टेदारी दी गई थी। रहवासियों का तर्क है कि बिना सुनवाई, पुनर्वास और मुआवजे के उन्हें नहीं हटाया जा सकता।

जबलपुर एयरपोर्ट से उड़ानें बढ़ाने पर हाई कोर्ट ने मांगा राज्य सरकार से सुझाव

जबलपुर हाई कोर्ट ने राज्य सरकार से जबलपुर एयरपोर्ट से हवाई सेवाओं को बढ़ाने के लिए सुझाव मांगे हैं। मुख्य न्यायाधीश अल्पेश यशवंत कोगजे और न्यायमूर्ति विवेक जैन की युगलपीठ ने सरकार से अधिक उड़ानें संचालित करने के लिए उठाए जा सकने वाले कदमों की जानकारी देने को कहा। इंजीनियर सुधीर दत्त और विधि छात्र पार्थ श्रीवास्तव की याचिका पर सुनवाई हुई, जिसमें बताया गया कि 480 करोड़ रुपये खर्च कर एयरपोर्ट का उन्नयन किया गया है और 2750 मीटर लंबा रनवे बड़े विमानों के लिए अनुकूल है, फिर भी केवल पांच उड़ानें संचालित हो रही हैं।

सुप्रीम कोर्ट: टिकट बरामद न होने पर भी ट्रेन हादसे में मृतक के माता-पिता को मिलेगा मुआवजा

सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात में 2017 के ट्रेन हादसे में मृतक के माता-पिता को आठ लाख रुपये का मुआवजा बहाल कर दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि मृत यात्री से टिकट बरामद न होने मात्र से मुआवजे का दावा समाप्त नहीं किया जा सकता। न्यायमूर्ति उज्जल भुइयां और ए.एस. चंदुरकर की पीठ ने गुजरात हाईकोर्ट के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसने मुआवजे को खारिज कर दिया था। शीर्ष अदालत ने कहा कि पिता के शपथ पर दिए बयान और एक महीने से अधिक समय तक अस्पताल में इलाज जैसे तथ्यों से यात्री के वास्तविक होने की पुष्टि होती है। यह राशि मृतक के माता-पिता को 30 दिनों के भीतर दी जाए।

ओबीसी क्रीमीलेयर निर्धारण केवल वेतन पर आधारित नहीं हो सकता: हाई कोर्ट

उच्च न्यायालय की ग्वालियर खंडपीठ ने ओबीसी प्रमाणपत्र से जुड़े एक मामले में महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। कोर्ट ने कहा कि क्रीमीलेयर का निर्धारण केवल माता-पिता के वेतन के आधार पर नहीं किया जा सकता, बल्कि उनकी सेवा स्थिति, पद की श्रेणी, पदोन्नति की तारीख और आय के स्वरूप सहित अन्य निर्धारित मापदंडों की जांच भी आवश्यक है। आवेदिका रागिनी राठौर के मामले में, न्यायालय ने पूर्व में पारित दो आदेश रद्द कर दिए और प्रकरण को नए सिरे से निर्णय के लिए सक्षम अधिकारी के पास भेज दिया है। सक्षम अधिकारी को छह सप्ताह में कारणयुक्त आदेश पारित करने का निर्देश दिया गया है।

रिश्वत की मांग साबित न होने पर दोषसिद्धि नहीं: जबलपुर जिला न्यायालय

जबलपुर जिला न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि रिश्वत की रकम बरामद होने के बावजूद, यदि रिश्वत की मांग साबित न हो, तो दोषसिद्धि नहीं हो सकती। विशेष न्यायाधीश मनीष सिंह ठाकुर ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (पीसी एक्ट) के तहत सहायक ग्रेड-टू प्रदीप कुमार श्रीवास्तव को दोषमुक्त किया। लोकायुक्त ने उन्हें ₹2,000 लेते हुए पकड़ा था, लेकिन बचाव पक्ष ने रिकॉर्डिंग में आवाज की प्रामाणिकता और पूर्व विवाद का तर्क दिया। न्यायालय ने पीसी एक्ट की धारा 20 और 7 की व्याख्या करते हुए मांग साबित करने की आवश्यकता पर जोर दिया, जिसके अभाव में दोषमुक्त किया गया।

हाई कोर्ट ने सेवानिवृत्त कर्मचारी के जाति प्रमाण-पत्र जांच का 21 साल पुराना आदेश किया निरस्त

हाई कोर्ट ने सेवानिवृत्त कर्मचारी महेंद्र सिंह ठाकुर के जाति प्रमाण-पत्र की वैधता से संबंधित 21 साल पुराने एकलपीठ के आदेश को निरस्त कर दिया है। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश विवेक रूसिया और न्यायमूर्ति प्रदीप मित्तल की युगलपीठ ने कहा कि जब कर्मचारी सेवानिवृत्त हो चुका है और विभागीय जांच में उसका प्रमाण-पत्र वैध पाया गया है, तो इतने लंबे अंतराल के बाद हाई पावर कमेटी से जांच कराने का कोई उपयोगी उद्देश्य नहीं है। कोर्ट ने 2005 और 2008 के संबंधित आदेशों को रद्द कर दिया।

भोजशाला विवाद में सुनवाई टली, खसरा संख्या 612 पर ही होगी नमाज

मध्य प्रदेश के धार जिले की भोजशाला से जुड़े विवाद में सुप्रीम कोर्ट में मस्जिद पक्ष की अंतरिम याचिका पर गुरुवार को सुनवाई टल गई। इसके चलते, सुप्रीम कोर्ट की पूर्व निर्धारित अंतरिम व्यवस्था के अनुसार, इस शुक्रवार को भी भोजशाला के पीछे स्थित खसरा संख्या- 612 की भूमि पर दोपहर एक से तीन बजे के बीच नमाज अदा की जाएगी। जिला प्रशासन ने इसके लिए सभी आवश्यक सुरक्षा और आवागमन व्यवस्थाएं पूरी कर ली हैं। सुप्रीम कोर्ट ने 14 जुलाई को इस मामले को संवेदनशील बताते हुए मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के 15 मई के आदेश पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था और वैकल्पिक नमाज स्थल की व्यवस्था दी थी।