जबलपुर जिला न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा कि रिश्वत की रकम बरामद होने के बावजूद, यदि रिश्वत की मांग साबित न हो, तो दोषसिद्धि नहीं हो सकती। विशेष न्यायाधीश मनीष सिंह ठाकुर ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (पीसी एक्ट) के तहत सहायक ग्रेड-टू प्रदीप कुमार श्रीवास्तव को दोषमुक्त किया। लोकायुक्त ने उन्हें ₹2,000 लेते हुए पकड़ा था, लेकिन बचाव पक्ष ने रिकॉर्डिंग में आवाज की प्रामाणिकता और पूर्व विवाद का तर्क दिया। न्यायालय ने पीसी एक्ट की धारा 20 और 7 की व्याख्या करते हुए मांग साबित करने की आवश्यकता पर जोर दिया, जिसके अभाव में दोषमुक्त किया गया।
हाई कोर्ट ने सेवानिवृत्त कर्मचारी महेंद्र सिंह ठाकुर के जाति प्रमाण-पत्र की वैधता से संबंधित 21 साल पुराने एकलपीठ के आदेश को निरस्त कर दिया है। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश विवेक रूसिया और न्यायमूर्ति प्रदीप मित्तल की युगलपीठ ने कहा कि जब कर्मचारी सेवानिवृत्त हो चुका है और विभागीय जांच में उसका प्रमाण-पत्र वैध पाया गया है, तो इतने लंबे अंतराल के बाद हाई पावर कमेटी से जांच कराने का कोई उपयोगी उद्देश्य नहीं है। कोर्ट ने 2005 और 2008 के संबंधित आदेशों को रद्द कर दिया।
मध्य प्रदेश के धार जिले की भोजशाला से जुड़े विवाद में सुप्रीम कोर्ट में मस्जिद पक्ष की अंतरिम याचिका पर गुरुवार को सुनवाई टल गई। इसके चलते, सुप्रीम कोर्ट की पूर्व निर्धारित अंतरिम व्यवस्था के अनुसार, इस शुक्रवार को भी भोजशाला के पीछे स्थित खसरा संख्या- 612 की भूमि पर दोपहर एक से तीन बजे के बीच नमाज अदा की जाएगी। जिला प्रशासन ने इसके लिए सभी आवश्यक सुरक्षा और आवागमन व्यवस्थाएं पूरी कर ली हैं। सुप्रीम कोर्ट ने 14 जुलाई को इस मामले को संवेदनशील बताते हुए मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के 15 मई के आदेश पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था और वैकल्पिक नमाज स्थल की व्यवस्था दी थी।
मध्यप्रदेश हाई कोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने डबरा में अवैध खनन मामले में सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने सहायक खनिज अधिकारी घनश्याम यादव को निलंबित करने का आदेश दिया, उन पर अवैध खननकर्ताओं की सक्रिय मदद करने का आरोप लगाया। खंडपीठ ने स्थानीय प्रशासन और खनिज विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर टिप्पणियां कीं, यहां तक कि कलेक्टर ग्वालियर से उनकी अक्षमता पर जवाब मांगा। एसडीओ जूही गर्ग को नोडल अधिकारी की जिम्मेदारी से मुक्त कर दिया गया है, और अब कलेक्टर को ही सभी हलफनामे दाखिल करने होंगे। कोर्ट ने खनन क्षेत्र की ड्रोन वीडियोग्राफी और शुक्रवार तक हलफनामा प्रस्तुत करने का भी निर्देश दिया है।
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की पांच जजों की वृहद पीठ ने सरकारी ठेकों और ब्लैकलिस्टिंग पर ऐतिहासिक निर्णय दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी ठेकेदार को ब्लैकलिस्ट करना उसकी व्यावसायिक मृत्यु के समान है, और इससे होने वाली गैर-मौद्रिक क्षति का आकलन नहीं हो सकता। ऐसे मामले मध्य प्रदेश मध्यस्थम अधिकरण अधिनियम, 1983 के क्षेत्राधिकार से बाहर हैं, और प्रभावित ठेकेदार सीधे हाई कोर्ट में रिट याचिका दायर कर सकते हैं। यह निर्णय मेसर्स नितिन एंटरप्राइजेज के मामले में आया, जिन्हें नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने ब्लैकलिस्ट किया था।
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने न्यायमूर्ति विवेक जैन की एकलपीठ के माध्यम से एक महत्वपूर्ण आदेश दिया है, जिसमें स्पष्ट किया गया है कि केवल फतवे के आधार पर मुस्लिम विवाह समाप्त नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने कहा कि धार्मिक संस्थाएं केवल धार्मिक राय दे सकती हैं, जबकि विवाह विच्छेद का कानूनी अधिकार केवल सक्षम अदालतों के पास है। यह आदेश भोपाल की दारुल-दफ़ा मसाजिद कमेटी के एक फतवे से जुड़े मामले में आया, जहां पति फतवे के आधार पर तलाक चाहता था। हाई कोर्ट ने पति को पारिवारिक न्यायालय में नई तलाक याचिका दाखिल करने की स्वतंत्रता दी।
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण से जुड़े मामलों में अंतिम सुनवाई पूरी हो गई है और फैसला सुरक्षित रख लिया गया है। प्रशासनिक न्यायाधीश आनंद पाठक व न्यायमूर्ति विनय सराफ की विशेष युगलपीठ ने ढाई घंटे से अधिक चली सुनवाई के दौरान आरक्षण की संवैधानिक वैधता, 50 प्रतिशत की सीमा और ओबीसी की आबादी जैसे विभिन्न कानूनी पहलुओं पर दलीलें सुनीं। वरिष्ठ अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर ने ओबीसी पक्ष की ओर से 27 प्रतिशत आरक्षण बरकरार रखने की मांग की। अब हजारों अभ्यर्थियों, सरकार और विभिन्न पक्षों की निगाहें हाई कोर्ट के निर्णय पर टिकी हैं।
जबलपुर हाई कोर्ट ने रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय के कर्मचारियों के नियमितीकरण को निलंबित करने के कुलगुरु के आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी है। न्यायमूर्ति विशाल धगट की एकलपीठ ने कहा कि अनियमितता का ठोस आधार नहीं है और 14 जुलाई, 2026 का आदेश जांच रिपोर्ट आने तक प्रभावी नहीं रहेगा। कर्मचारियों को अंडरटेकिंग देनी होगी कि प्रतिकूल रिपोर्ट आने पर वे अंतर राशि लौटाएंगे। अगली सुनवाई सितंबर में होगी। वहीं, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने मेडिकल इंटर्न्स का स्टाइपेंड 30,000 रुपये करने की मांग करते हुए मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजा है।
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को ठोस कचरा प्रबंधन नियम, 2026 के तहत प्रदूषण फैलाने वाली संस्थाओं और व्यक्तियों पर पर्यावरण मुआवजा लगाने व वसूलने के लिए एकसमान और स्पष्ट दिशानिर्देश तैयार करने का निर्देश दिया है। जस्टिस पी. एस. नरसिम्हा और आलोक अराधे की पीठ ने कहा कि मुआवजा तय करने का नियम मनमाना नहीं हो सकता और यह प्रकृति को हुए वास्तविक नुकसान की भरपाई के लिए होना चाहिए।
इंदौर जिला कोर्ट ने सड़क हादसे में आंख गंवाने वाले 30 वर्षीय संदीप को 14 लाख रुपये क्षतिपूर्ति देने का आदेश दिया है। कोर्ट ने माना कि जीवन के लिए दोनों आंखें महत्वपूर्ण हैं, और जिम्मेदार पक्ष अपने दायित्व से बच नहीं सकता। 20 मई 2023 को हुए हादसे में संदीप की बाईं आंख की रोशनी चली गई थी। इसके अतिरिक्त, इंदौर जिला कोर्ट में 5 अगस्त 2026 को अभिभाषकों के लिए एक नि:शुल्क नेत्र शिविर आयोजित किया जा रहा है, जिसमें आंखों की जांच और मोतियाबिंद के ऑपरेशन किए जाएंगे। इंदौर को एक स्थाई फास्ट-ट्रैक कोर्ट भी मिलने वाला है, जिससे शिक्षा-रोजगार मामलों में त्वरित न्याय मिलेगा।