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चौथे समयमान वेतनमान पर मंत्रालय कर्मचारियों में रोष, तीन साल से लाभ लंबित

वर्ष 2023 में 35 साल की सेवा पूरी करने वाले कर्मचारियों को चौथा समयमान वेतनमान देने का निर्णय लिया गया था, जिसके आदेश सामान्य प्रशासन विभाग ने जारी किए। हालांकि, मंत्रालय, विधानसभा और लोकभवन के कर्मचारियों को तीन साल बाद भी इसका लाभ नहीं मिला, जबकि शिक्षक और पशु चिकित्सा क्षेत्र अधिकारी संवर्ग को यह लाभ दे दिया गया। इस असमानता के कारण कर्मचारियों में भारी असंतोष है। मंत्रालय सेवा अधिकारी-कर्मचारी संघ ने जल्द निर्णय न होने पर आंदोलन की चेतावनी दी है। संघ अध्यक्ष सुधीर नायक ने बताया कि कैबिनेट अनुमोदन के लिए प्रकरण तीन साल से लंबित है।

जबलपुर मंडल के रेल कर्मचारियों को एचआरएमएस से ऑनलाइन एनओसी आवेदन की सुविधा

जबलपुर मंडल के रेल कर्मचारियों के लिए अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) प्राप्त करना अब सरल हो गया है। पश्चिम मध्य रेलवे के इस मंडल के कर्मचारी नई नौकरी, प्रतियोगी परीक्षा या शैक्षणिक कार्यों हेतु एचआरएमएस आईडी से लॉग इन कर एम्प्लॉई सेल्फ सर्विस (ईएसएस) के एनओसी टैब के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। यह सुविधा 24 घंटे उपलब्ध है, जिससे कार्यालयों के चक्कर लगाने की आवश्यकता समाप्त हो गई है। यह प्रणाली कागजी कार्यवाही को कम करेगी, समय बचाएगी और आवेदनों के निपटान में पारदर्शिता लाएगी, साथ ही डिजिटल सेवाओं को बढ़ावा देगी। इसके अतिरिक्त, नवंबर माह से मासिक शिकायत कैंप भी आयोजित किए जा रहे हैं।

एमपी के 10 लाख से अधिक अधिकारियों-कर्मचारियों का महंगाई भत्ता 18% तक बढ़ सकता है

मध्यप्रदेश में 10 लाख से अधिक अधिकारियों-कर्मचारियों का महंगाई भत्ता अगले वित्तीय वर्ष में 18 प्रतिशत तक बढ़ सकता है। सरकार वित्तीय वर्ष 2027-28 के बजट में विभागों के स्थापना व्यय में 78 प्रतिशत महंगाई भत्ता प्रावधानित करेगी। वर्तमान में महंगाई भत्ता 60 प्रतिशत है, जबकि केंद्र सरकार इसे 62 प्रतिशत कर चुकी है। प्रदेश सरकार ने अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम और कमजोर मानसून के कारण वृद्धि का निर्णय नहीं लिया है। कर्मचारी और पेंशनर संगठन लगातार महंगाई भत्ता बढ़ाने की मांग कर रहे हैं, तृतीय वर्ग कर्मचारी संघ ने 18 अगस्त को आंदोलन की घोषणा की है।

मुख्यमंत्री के निर्देश के बावजूद दो से अधिक संतान का प्रावधान खत्म करने का मामला ब्यूरोक्रेसी में अटका

मध्य प्रदेश में सरकारी नौकरी के लिए दो से अधिक संतान वाले लगभग 25 साल पुराने प्रावधान को खत्म करने का मामला नौकरशाही स्तर पर अटक गया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देशों के बावजूद सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) अब तक इससे संबंधित प्रस्ताव कैबिनेट में नहीं ला सका। पूर्व मुख्य सचिव के कार्यकाल में भी वरिष्ठ सचिव समिति ने इस प्रस्ताव को मंजूरी नहीं दी थी। मुख्यमंत्री ने GAD के एक ड्राफ्ट पर भी आपत्ति जताई थी, जिसमें यह पाबंदी बरकरार रखी गई थी। इस प्रावधान को 2001 में लागू किया गया था और कर्मचारी संगठन लगातार इसका विरोध कर रहे हैं।

पदोन्नति में आरक्षण नियम निरस्ती को सरकार की सुप्रीम कोर्ट में चुनौती

पदोन्नति में आरक्षण का मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है, जिसके कारण अधिकारियों-कर्मचारियों की पदोन्नति पर अनिश्चितता बनी हुई है। हाई कोर्ट जबलपुर ने पदोन्नति नियम-2002 को निरस्त किया था, जिसे सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है और यह मामला अभी विचाराधीन है। मई 2016 से पदोन्नतियां बंद थीं, जिसके बाद सरकार ने वैकल्पिक व्यवस्था के तहत उच्च पद का प्रभार दिया। नए पदोन्नति नियम-2025 लागू होने के बाद जून से लगभग 60 हजार पदोन्नतियां हुई हैं, हालांकि हाई कोर्ट में इन नियमों पर सुनवाई जारी है। हाई कोर्ट ने सरकार से सुप्रीम कोर्ट में लंबित मामले के शीघ्र निराकरण के लिए प्रयास करने को कहा है।

रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय कर्मचारियों के नियमितीकरण स्थगन आदेश पर हाई कोर्ट की अंतरिम रोक

जबलपुर हाई कोर्ट ने रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय के कर्मचारियों के नियमितीकरण को निलंबित करने के कुलगुरु के आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी है। न्यायमूर्ति विशाल धगट की एकलपीठ ने कहा कि अनियमितता का ठोस आधार नहीं है और 14 जुलाई, 2026 का आदेश जांच रिपोर्ट आने तक प्रभावी नहीं रहेगा। कर्मचारियों को अंडरटेकिंग देनी होगी कि प्रतिकूल रिपोर्ट आने पर वे अंतर राशि लौटाएंगे। अगली सुनवाई सितंबर में होगी। वहीं, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने मेडिकल इंटर्न्स का स्टाइपेंड 30,000 रुपये करने की मांग करते हुए मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजा है।

हाई कोर्ट ने अशोकनगर कलेक्टर को तीन साल से निलंबित कर्मचारी के निलंबन की समीक्षा का निर्देश दिया

मध्यप्रदेश हाई कोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने अशोकनगर कलेक्टर को लगभग तीन वर्ष से निलंबित एक शासकीय कर्मचारी, बृजेंद्र सिंह यादव, के निलंबन की समीक्षा करने का निर्देश दिया है। अदालत ने राज्य शासन के 28 जनवरी 2013 के परिपत्र का हवाला देते हुए कहा कि प्रत्येक छह माह में निलंबन की समीक्षा आवश्यक है। याचिकाकर्ता को 5 अगस्त 2021 को आपराधिक मामले के कारण निलंबित किया गया था। राज्य शासन ने फर्जी प्रमाणपत्रों से नौकरी पाने के आरोप को गंभीर बताया, जबकि हाई कोर्ट ने कहा कि निलंबन प्रशासनिक निर्णय है, पर इसका समय-समय पर पुनर्विचार आवश्यक है।

मध्य प्रदेश में कर्मचारियों के प्रमोशन में आरक्षण मामले की सुनवाई 18 अगस्त तक स्थगित

मध्य प्रदेश में सरकारी कर्मचारियों के प्रमोशन में आरक्षण का विवाद सुप्रीम कोर्ट में लंबित विशेष अनुमति याचिका के कारण हाई कोर्ट में आगे नहीं बढ़ सका। सोमवार को करीब एक घंटे की बहस के बाद हाई कोर्ट ने सुनवाई 18 अगस्त तक टाल दी। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट की एसएलपी पर स्थिति स्पष्ट होने के बाद ही रिट अपील पर सुनवाई उचित होगी। दोनों पक्ष सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी की जल्द सुनवाई के लिए संयुक्त आवेदन देंगे। न्यायमूर्ति विवेक अग्रवाल ने अपने पुराने जुड़ाव का खुलासा किया, जिस पर किसी पक्ष को आपत्ति नहीं थी।

पदोन्नति प्रक्रिया पर सवाल, हाईकोर्ट में नियम 2025 पर सुनवाई संभव

मध्य प्रदेश में 2016 के बाद शुरू हुई पदोन्नतियों पर सवाल उठ रहे हैं, जहां कुछ विभागों में केवल नोटिस के आधार पर पदोन्नतियां रोकी जा रही हैं और अनारक्षित पदों पर कार्रवाई नहीं हो रही। भारतीय पशु चिकित्सा परिषद ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और मुख्य सचिव अशोक वर्णवाल से शिकायत की है। तृतीय वर्ग कर्मचारी संघ ने भी कंप्यूटर दक्षता प्रमाणीकरण की आड़ में पदोन्नति रोकने का आरोप लगाया। मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री कार्यालय ने जांच के निर्देश दिए हैं। पदोन्नति नियम 2025 को लेकर जबलपुर हाईकोर्ट में जल्द सुनवाई संभावित है।

आउटसोर्स कर्मचारियों का भोपाल में प्रदर्शन, 26 अक्टूबर को मंत्रालय घेराव की चेतावनी

मध्य प्रदेश के आउटसोर्स कर्मचारियों ने भोपाल में अपनी 17 सूत्रीय मांगों को लेकर विरोध प्रदर्शन किया। भारतीय मजदूर संघ के नेतृत्व में लगभग 1500 कर्मचारियों ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को ज्ञापन सौंपा। उन्होंने सरकार को चेतावनी दी है कि यदि मांगें पूरी नहीं हुईं तो 17 सितंबर को जिला मुख्यालयों पर धरना दिया जाएगा और 26 अक्टूबर को दो लाख कर्मचारी भोपाल में मंत्रालय का घेराव करेंगे। कर्मचारियों की प्रमुख मांगों में नियमितीकरण, सेवा सुरक्षा, न्यूनतम वेतन और सामाजिक सुरक्षा शामिल हैं।