जबलपुर हाई कोर्ट की न्यायमूर्ति विशाल धगट की एकलपीठ ने कृषि विभाग की भर्ती प्रक्रिया में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) की सीटों में अचानक की गई कटौती पर गंभीर रुख अपनाया है। ग्रामीण कृषि अधिकारी के पदों के लिए निर्धारित 444 EWS सीटों को आवेदन की अंतिम तिथि, 17 जुलाई, 2026 को घटाकर 37 कर दिया गया था। याचिकाकर्ता मोहित सिंह परमार ने इस बदलाव को चुनौती दी है। हाई कोर्ट ने कृषि विभाग से चार सप्ताह के भीतर इस कटौती का आधार स्पष्ट करने के लिए जवाब तलब किया है। मामले की अगली सुनवाई चार सप्ताह बाद होगी।
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने न्याय प्रक्रिया को सरल, पारदर्शी और तकनीक-आधारित बनाने के लिए कई डिजिटल नवाचार किए हैं। ई-कोर्ट सेवाओं के माध्यम से पक्षकार अब घर बैठे अपने प्रकरण की स्थिति देख सकते हैं, जिससे कोर्ट आने-जाने का समय और खर्च कम हुआ है। जबलपुर, इंदौर और ग्वालियर खंडपीठों को एकीकृत डिजिटल व्यवस्था से जोड़ा गया है। हाई कोर्ट और जिला न्यायालयों में ई-सेवा केंद्र स्थापित किए गए हैं, जो अधिवक्ताओं और पक्षकारों को ई-फाइलिंग तथा अन्य आनलाइन न्यायिक सेवाओं में सहायता प्रदान करते हैं।
मप्र हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने वार्ड 60 की पार्षद सुनेहरा अंसाफ अंी का निर्वाचन शून्य घोषित करने वाले जिला कोर्ट के 17 जुलाई 2026 के आदेश पर रोक लगा दी है। न्यायमूर्ति संदीप एन भट्ट ने निर्वाचन आयोग द्वारा उपचुनाव की घोषणा पर भी रोक लगाई। सुनेहरा अंी ने 2022 के नगर निगम चुनाव में लगभग पांच हजार मतों से जीत हासिल की थी, जिसे इफ्तेखार (मुन्ना) अंी ने गलत नो-ड्यूज प्रमाण पत्र प्रस्तुत करने और भ्रामक प्रचार के आरोपों के साथ चुनौती दी थी। हाई कोर्ट ने अंी के अंतरिम आवेदन को स्वीकार करते हुए कहा कि बिना व्यक्तिगत गलती के निर्वाचित प्रतिनिधि को हटाना मतदाताओं के साथ अन्याय है।
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने जबलपुर की ट्रैफिक व्यवस्था में सुधार के लिए विशेषज्ञ समिति गठित करने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने बदहाल ट्रैफिक सिग्नल, जाम और अतिक्रमण की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए माना कि सकारात्मक कदम उठाए गए हैं, लेकिन अभी बहुत कुछ किया जाना बाकी है। कोर्ट ने ट्रैफिक पुलिस को ट्रैफिक इंजीनियरिंग, ट्रैफिक एजुकेशन और ट्रैफिक एनफोर्समेंट के तीनों पहलुओं पर सक्रियता से काम करने को कहा। अगली सुनवाई 28 सितंबर 2026 से शुरू होने वाले सप्ताह में होगी।
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने माता-पिता के विरोध के बावजूद जैन साध्वी बनने की इच्छुक 20 वर्षीय महिला को राहत दी है। इंदौर बेंच के जस्टिस संदीप एन. भट्ट ने 7 सितंबर को अपने आदेश में कहा कि एक बालिग नागरिक अपनी जिंदगी से जुड़े फैसले लेने और अपनी पसंद के धर्म का पालन करने के लिए स्वतंत्र है। महिला ने श्वेतांबर जैन धर्म अपनाने और दीक्षा लेने का फैसला किया था, लेकिन उसके माता-पिता और रिश्तेदार विरोध कर रहे थे। कोर्ट ने महिला को पुलिस सुरक्षा मांगने का अधिकार दिया और संबंधित अधिकारियों को तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए, यदि उसे जबरदस्ती का सामना करना पड़ता है।
जबलपुर हाई कोर्ट से सेवानिवृत्त हुए न्यायमूर्ति अवनींद्र कुमार सिंह ने देहदान और ₹1.01 करोड़ के दान का संकल्प लिया है। उन्होंने अपनी पत्नी के साथ मेडिकल कॉलेज, जबलपुर में देहदान के लिए पंजीकरण कराया, ताकि उनकी देह मेडिकल विद्यार्थियों के अध्ययन में काम आ सके। न्यायमूर्ति सिंह ने अपने जीपीएफ से ₹1.01 करोड़ प्रधानमंत्री केयर्स फंड में दान करने की घोषणा भी की। उनका यह समर्पण समारोह में मौजूद लोगों को भीतर तक छू गया और उनके व्यक्तित्व के संवेदनशील पक्ष को उजागर किया। उन्होंने अपनी न्यायिक यात्रा में मिले सहयोग के लिए कर्मचारियों और अधिवक्ताओं का आभार व्यक्त किया।
माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल की रजिस्ट्रार डॉ. पी. शशिकला की वर्ष 2014 में एसोसिएट प्रोफेसर पद पर हुई नियुक्ति को हाई कोर्ट में चुनौती दी गई है। याचिका स्वीकार करते हुए कोर्ट ने डॉ. शशिकला सहित सात प्रतिवादियों को नोटिस जारी किए हैं। डॉ. आशुतोष मिश्रा की ओर से दायर याचिका में आरोप है कि डॉ. शशिकला नियुक्ति के समय निर्धारित योग्यताएं, विशेषकर कंप्यूटर एप्लीकेशन या मास कम्युनिकेशन में मास्टर डिग्री की शर्त, पूरी नहीं करती थीं।
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने 2016-17 की देशी मदिरा टेंडर प्रक्रिया से जुड़े कथित सिंडीकेट और प्रतिस्पर्धा अनियमितताओं के मामले में सात शराब कारोबारियों की याचिकाएं खारिज कर दी हैं। कोर्ट ने भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (सीसीआई) को जांच पूरी कर प्रतिस्पर्धा अधिनियम की धारा 27 के तहत अंतिम आदेश पारित करने के निर्देश दिए हैं, साथ ही सीसीआई की जांच पर लगी रोक भी हटा दी है। युगलपीठ ने तर्क दिया कि कंपनियों के पास सीसीआई की कार्रवाई के विरुद्ध एनसीएलएटी में अपील करने का वैधानिक विकल्प उपलब्ध था, इसलिए सीधे हाई कोर्ट में हस्तक्षेप का आधार नहीं बनता।
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में 35 हजार से अधिक अवमानना प्रकरण लंबित हैं, जिससे लंबित मामलों के निराकरण की चुनौती जटिल हो गई है। आदेशों का पालन न होने पर पक्षकार दोबारा न्यायालय का रुख करते हैं, जिससे अतिरिक्त न्यायिक प्रक्रिया शुरू होती है। मार्च 2025 के अंत तक हाई कोर्ट में 4.71 लाख से अधिक प्रकरण लंबित थे। आदेशों के समय पर पालन न होने से न्यायालय के अतिरिक्त समय और संसाधनों की मांग बढ़ जाती है, जिससे मूल मामलों के निराकरण की गति प्रभावित होती है।
हाई कोर्ट ने बुरहानपुर की भाजपा विधायक अर्चना चिटनिस और प्रदेश के गृह सचिव समेत अन्य अधिकारियों को नोटिस जारी किया है। यह नोटिस शक्कर मिल के नाम पर करोड़ों रुपये की बैलेंस शीट तैयार करने और उसके आडिट कराने के आरोपों से संबंधित याचिका पर दिया गया है। याचिकाकर्ता धर्मेंद्र शुक्ला ने आरोप लगाया है कि मिल का उद्घाटन हुआ और सरकारी राशि भी मिली, लेकिन मौके पर कोई प्लांट नहीं मिला। इस मामले में जमीन खरीद, प्लांट स्थापना और कथित अनियमितताओं की जांच की मांग की गई है।