मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने पटवारियों की हड़ताल को चुनौती देने वाली जनहित याचिका खारिज कर दी है। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश विवेक रूसिया और न्यायमूर्ति प्रदीप मित्तल की युगलपीठ ने यह फैसला पटवारी संघ द्वारा हड़ताल वापस लेने की जानकारी दिए जाने के बाद सुनाया। यह याचिका नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच के पी.जी. नाजपांडे और रजत भार्गव ने दायर की थी। याचिका में चार अगस्त से जारी पटवारियों की हड़ताल से राजस्व कार्यों और आम जनता को हो रही परेशानियों का उल्लेख किया गया था। याचिकाकर्ताओं ने सरकारी कर्मचारियों के हड़ताल के अधिकार पर सवाल उठाते हुए न्यायालय से हस्तक्षेप की मांग की थी।
भोपाल के त्विषा शर्मा डेथ केस में आरोपी पूर्व जज गिरिबाला सिंह की नियमित जमानत अर्जी पर सोमवार को हाई कोर्ट में सुनवाई टल गई। न्यायमूर्ति अजय कुमार निरंकारी की एकलपीठ के समक्ष प्रकरण का नंबर नहीं आ पाने के कारण यह सुनवाई स्थगित हुई। अब 12 अगस्त को सुनवाई होने की संभावना है। गिरिबाला सिंह ने भोपाल की ट्रायल कोर्ट द्वारा 25 जुलाई को जमानत अर्जी खारिज किए जाने के बाद हाई कोर्ट का रुख किया है। मृतका त्विषा शर्मा के पिता ने भी आरोपी की जमानत का विरोध करते हुए आपत्ति आवेदन पेश किया है, जिस पर जमानत अर्जी के साथ सुनवाई होगी।
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में सरकारी स्कूलों के शिक्षकों की ई-अटेंडेंस व्यवस्था पर सुनवाई पूरी हो गई है और फैसला सुरक्षित रख लिया गया है। मुख्य सवाल यह है कि क्या सरकारी काम के लिए कर्मचारियों को निजी मोबाइल और इंटरनेट जैसे संसाधनों का उपयोग करने के लिए बाध्य किया जा सकता है। मैहर जिले के सत्येंद्र सिंह तिवारी की याचिका में शिक्षकों को निजी संसाधन उपयोग करने की मजबूरी और व्यक्तिगत डिजिटल जानकारी के इस्तेमाल का मुद्दा उठाया गया है। कोर्ट के फैसले से ई-अटेंडेंस की जिम्मेदारी और निजी संसाधनों के उपयोग की सीमा स्पष्ट होने की उम्मीद है।
ग्वालियर हाई कोर्ट की खंडपीठ ने डबरा में अवैध खनन और खनिज परिवहन के मामले में सरकार द्वारा अपनाए जा रहे उपायों पर सवाल उठाए। न्यायालय ने सीसीटीवी निगरानी और ट्रक नंबर प्लेट बदलने की स्थिति में पहचान पर संतोषजनक जवाब न मिलने पर चिंता व्यक्त की। कोर्ट ने सुझाव दिया कि ट्रकों की बॉडी और कांच पर बड़े अक्षरों में नंबर अंकित किए जाएं। पिछली सुनवाई में अशोक सिंह यादव की खदानों में खनन गतिविधियों पर रोक लगाई गई थी और रिकॉर्ड छिपाने पर सवाल उठे थे। अगली सुनवाई मंगलवार को होगी, जिसमें कलेक्टर को उपस्थित रहना होगा और ड्रोन फुटेज की समीक्षा की जाएगी।
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि सौतेला बेटा भी किराएदारी कानून के तहत बेटे की श्रेणी में आता है। यदि उसके कारोबार के लिए दुकान की वास्तविक जरूरत है, तो मां किराएदार से दुकान खाली करा सकती है। यह निर्णय 21 साल पुराने किराएदारी विवाद में आया, जिसमें जस्टिस आशीष श्रोती ने निचली अपीलीय अदालत के फैसले को निरस्त कर दिया। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि पहली मंजिल की जगह को भूतल की दुकान का समान विकल्प नहीं माना जा सकता।
जबलपुर हाई कोर्ट ने हत्या के आरोप में आजीवन कारावास की सजा भुगत रहे राजेंद्र यादव और उनके बेटों सत्येंद्र व जितेंद्र यादव को दोषमुक्त कर दिया। कोर्ट ने अभियोजन की कहानी में कई महत्वपूर्ण विसंगतियां पाईं। एक बेटा जितेंद्र यादव वारदात के समय झांसी के अस्पताल में भर्ती था, फिर भी उसे करीब 10 साल छह महीने जेल में रहना पड़ा। हाई कोर्ट ने पाया कि अज्ञात आरोपियों पर आगे की जांच का उल्लेख नहीं था, गवाहों के बयानों में विरोधाभास थे, और कथित हथियार पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टर को नहीं दिखाए गए थे।
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने लापता युवक की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर सुनवाई करते हुए सख्त टिप्पणी की है। कोर्ट ने कहा कि पुलिस को आवश्यक जानकारी जानबूझकर छिपाना आपराधिक कृत्य की श्रेणी में आ सकता है। न्यायमूर्ति जीएस अहलूवालिया और न्यायमूर्ति अनुराधा शुक्ला की पीठ ने यह टिप्पणी 11 अगस्त 2026 को राधा प्रजापति की याचिका पर की। राज्य सरकार ने बताया कि प्रतिवादी, युवक का दादा, सहयोग नहीं कर रहा है, जबकि प्रतिवादी ने तथ्यों को छिपाने और वैवाहिक विवाद का दावा किया। पुलिस ने युवक को तीन दिन में बरामद कर कोर्ट में पेश करने की उम्मीद जताई है। अगली सुनवाई 14 अगस्त 2026 को होगी।
इंदौर-देवास बायपास की बदहाली पर मंगलवार को हाई कोर्ट में सुनवाई हुई। याचिकाकर्ता ने गड्ढों के फोटोग्राफ पेश किए, जिस पर कोर्ट ने उन्हें ‘जानलेवा’ और ‘खतरनाक’ बताया। कोर्ट ने राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) से 2023 से अब तक की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए मौखिक रूप से सात दिन में स्थिति सुधारने के निर्देश दिए। मातृ फाउंडेशन ने यह जनहित याचिका दायर की है। NHAI ने ठेकेदार हटाने की बात कही, लेकिन याचिकाकर्ता ने 18 फीट चौड़े गड्ढे की तस्वीरें पेश कीं।
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने मां से दुष्कर्म के आरोप में लगभग दस साल से जेल में बंद एक व्यक्ति को बरी कर दिया है। ट्रायल कोर्ट ने 18 अगस्त 2017 को उसे आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। हाई कोर्ट ने बयानों में महत्वपूर्ण विसंगतियां, प्राथमिकी दर्ज करने में देरी, और महत्वपूर्ण साक्ष्य प्रस्तुत न किए जाने के आधार पर अभियोजन की कहानी पर संदेह व्यक्त किया। अदालत ने पाया कि अभियोजन आरोपों को संदेह से परे साबित करने में विफल रहा, जिसके बाद आरोपी को संदेह का लाभ देते हुए सजा निरस्त कर दी गई।
मध्य प्रदेश की न्यायिक व्यवस्था में 8 और 9 अगस्त को इंदौर में सुप्रीम कोर्ट और विभिन्न हाई कोर्ट के 50 से अधिक न्यायाधीश न्याय व्यवस्था की चुनौतियों पर मंथन कर रहे हैं। 16 जुलाई 2026 तक मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में लगभग 4.90 लाख मुकदमे लंबित हैं, जिनमें 24,938 मामले 20 वर्ष से अधिक पुराने हैं। हाई कोर्ट में 53 स्वीकृत न्यायाधीश पदों में से लगभग 11 पद खाली हैं। सम्मेलन में तकनीक और सुधारों के साथ-साथ न्यायाधीशों की कमी और लंबित मामलों के वास्तविक अनुपात पर विचार की उम्मीद है ताकि न्यायपालिका को आधुनिक और पर्याप्त बनाया जा सके।