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2026-10-17

भाजपा प्रदेश में ओबीसी जातियों का आंतरिक सर्वे कराएगी

bulandsochnews Senior News Reporter

बुलंद सोच, भोपाल।

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) प्रदेश में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) की जातियों का आंतरिक सर्वे कराएगी। इस सर्वे के तहत ओबीसी में आने वाली जातियों और उनमें सम्मिलित उपजातियों के लोगों को सूचीबद्ध किया जाएगा। एक समग्र डेटा तैयार करके प्रदेश और केंद्रीय संगठन को भेजा जाएगा। इस पहल के पीछे पार्टी की मंशा ओबीसी वर्ग की उन जातियों को चिह्नित करना है, जिनका सत्ता और संगठन में प्रतिनिधित्व अपेक्षाकृत कम है।

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ओबीसी वर्ग की राजनीतिक प्रासंगिकता

प्रदेश की कुल आबादी में 56 प्रतिशत ओबीसी वर्ग से आता है, जिसमें 92 जातियां और उनकी उपजातियां शामिल हैं। इन जातियों की संख्या के अनुरूप आरक्षण दिए जाने की मांग लगातार बनी रहती है। आने वाले समय में पंचायत, नगरीय निकाय, विधानसभा और लोकसभा के चुनाव होने हैं, जिनमें ओबीसी प्रदेश की राजनीति के केंद्र में रहते हैं। ओबीसी को 27 प्रतिशत आरक्षण देने का मामला इस समय उच्च न्यायालय में निर्णायक स्थिति में पहुंच गया है। इन सभी परिस्थितियों के मद्देनजर, सत्ता और संगठन ओबीसी वर्ग को साधने में जुट गए हैं।

सर्वे की जिम्मेदारी और कार्यप्रणाली

भाजपा ने आंतरिक सर्वे का जिम्मा ओबीसी मोर्चा को सौंपा है। मोर्चा अध्यक्ष पवन पाटीदार ने इस कार्य के लिए जिला प्रभारी नियुक्त कर दिए हैं। इन प्रभारियों को नौ बिंदुओं का एक प्रपत्र भी दिया गया है, जिसके आधार पर रिपोर्ट तैयार की जाएगी। प्रदेश सरकार के पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण विभाग की आधिकारिक ओबीसी सूची को सर्वे का आधार बनाया जाएगा।

तैयार किए जाने वाले डेटा के मुख्य बिंदु

सर्वे में सभी जाति, उपजाति और सामाजिक समूहों की सूची बनाई जाएगी। इसमें जाति का प्रचलित नाम, उपजाति, पर्यायवाची नाम और संबंधित सामाजिक समूह दर्ज किया जाएगा। वास्तविक सामाजिक समूहों की संख्या और सरकारी सूची की प्रविष्टियों के बीच का अंतर भी स्पष्ट किया जाएगा। इसके अतिरिक्त, यह भी देखा जाएगा कि कौन-सी जातियां राजनीतिक रूप से प्रभावशाली हैं और कौन-सी जातियां संख्या या क्षेत्रीय प्रभाव के बावजूद राजनीतिक प्रतिनिधित्व में पीछे हैं।

राजनीतिक प्रतिनिधित्व का विवरण

भाजपा संगठन प्रत्येक ओबीसी जाति के सामने उसके प्रमुख राजनीतिक नेताओं की सूची तैयार कराएगा। इसमें पंचायत से लेकर संसद तक ओबीसी वर्ग का कितना प्रतिनिधित्व है, इसका डेटा तैयार होगा। ओबीसी नेताओं का पद, क्षेत्र, विधानसभा, लोकसभा, विभाग और संगठनात्मक जिम्मेदारी भी दर्ज की जाएगी। इससे भाजपा को यह समझने में मदद मिलेगी कि कौन-सी जातियां पार्टी से राजनीतिक रूप से जुड़ी हैं और कौन-सी जातियों को कहां कितना प्रतिनिधित्व मिल पाया है।

नौ बिंदुओं पर आधारित रिपोर्ट

नौ बिंदुओं के प्रपत्र के आधार पर तैयार होने वाली रिपोर्ट में निम्नलिखित विवरण शामिल होंगे:
मध्य प्रदेश की आधिकारिक ओबीसी सूची के आधार पर ओबीसी जातियों की संख्या।
ओबीसी में जातिवार भाजपा के वरिष्ठ प्रमुख ओबीसी नेताओं का विवरण।
ओबीसी में जातिवार नेताओं की सरकार एवं संगठन में भागीदारी का विवरण।
जिन जातियों को भाजपा में प्रतिनिधित्व नहीं मिला, उनका विवरण।
ओबीसी की सूची में शामिल वे जातियां जो केंद्रीय सूची में शामिल नहीं हो सकीं, उनका विवरण।
ओबीसी सांसद (लोकसभा एवं राज्यसभा) और विधायक की जातिवार सूची।
मध्य प्रदेश के ओबीसी समाज के महापुरुषों की सूची तथा उनकी जयंती एवं पुण्यतिथि का विवरण।
जिला कार्यकारिणी गठन और मंडल कार्यकारिणी गठन संबंधी जानकारी एवं अन्य संगठनात्मक विषयों से संबंधित विवरण।
मध्य प्रदेश की वर्तमान एवं आगामी चुनौतियों का विवरण।

ओबीसी मोर्चा का स्पष्टीकरण

भाजपा ओबीसी मोर्चा मध्य प्रदेश के प्रदेश कार्यालय मंत्री रामबाबू यादव ने बताया कि ओबीसी वर्ग की जातियों का डेटा तैयार कराया जा रहा है। उन्होंने कहा कि भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल की सहमति से ओबीसी मोर्चा अध्यक्ष पवन पाटीदार ने जिला प्रभारियों की नियुक्ति की है और उन्हें नौ बिंदुओं का प्रपत्र दिया है, जिसके आधार पर रिपोर्ट तैयार की जाएगी। रामबाबू यादव के अनुसार, पार्टी संगठन की मंशा यह है कि सत्ता और संगठन में ओबीसी वर्ग की उन जातियों के लोगों को प्रतिनिधित्व मिले, जिन्हें अपेक्षाकृत अब तक प्रतिनिधित्व कम या नहीं मिला है।