BREAKING NEWS
2026-10-17

जेन जी का लघुकथा विधा में प्रवेश लाभप्रद: कान्ता रॉय

bulandsochnews Senior News Reporter

बुलंद सोच, इंदौर।

मातृभाषा उन्नयन संस्थान द्वारा हिन्दी दिवस के उपलक्ष्य पर प्रीतमलाल दुआ सभागार, इंदौर में लघुकथा मंथन 2026 का सफल आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में साहित्य की विधा लघुकथा पर मुख्य चर्चा हुई। डॉ. पुरुषोत्तम दुबे और कान्ति शुक्ला को जीवन गौरव सम्मान से सम्मानित किया गया।

जेन जी और लघुकथा पर चर्चा

प्रथम सत्र का विषय समकालीन लघुकथा और जेन जी का सहभाग था, जिसकी अध्यक्षता लघुकथा केंद्र भोपाल की संस्थापक कान्ता रॉय ने की। कान्ता रॉय ने कहा कि एक ओर लघुकथा है, जो छोटी काया में बड़ी बात कहती है, और दूसरी ओर तेज गति से विकसित होते जेन जी हैं। उन्होंने इसे नवाचार का अद्भुत समन्वय बताया। उन्होंने यह भी कहा कि जेन जी को मोबाइल की पीढ़ी कहना अधूरी बात है, क्योंकि हर पीढ़ी अपने समय से निर्मित होती है। कान्ता रॉय के अनुसार, वर्तमान के लघुकथाकारों को जेन जी और मनुष्य की साइकोलॉजी को समझना चाहिए। उन्होंने जेन जी का लघुकथा विधा में प्रवेश बहुत लाभप्रद बताया। प्रथम सत्र में मुख्य अतिथि प्रेस क्लब अध्यक्ष दीपक कर्दम ने कहा कि हिन्दी भाषा राष्ट्र वंदना का स्वर है और इस भाषा के लिए मातृभाषा के माध्यम से जो कार्य किया जा रहा है, वह अनुकरणीय है। डॉ. पुरुषोत्तम दुबे ने कहा कि लेखन के लिए जेन जी के प्रति कटुता खत्म कर हमें हर पीढ़ी से जुड़ना चाहिए। उन्होंने विसंगतियों का अध्ययन कर उन्हें हटाने का सुझाव दिया। डॉ. दुबे ने जेन जी की रचनाओं को नवीनता और समाज उपयोगी बताया तथा उन्हें पोषित करने, लेखन उनसे जंचवाने और नए विचार को सम्मिलित करने की बात कही। उन्होंने यह भी कहा कि हमें अपनी लेखनी को निश्रित करना चाहिए, तब नई पीढ़ी के व्यक्तित्व और कृतित्व को भी शामिल करना चाहिए। कान्ति शुक्ला ने अपने संबोधन में कहा कि साहित्य में जीवन के हर पक्ष का समावेश होता है, जो समाज की जनपक्षधरता का संकेत है। उन्होंने युवाओं से अपनी रचनाओं में सकारात्मक संदेश देने की अपेक्षा की।

Advertisement

सत्रों का विवरण

संस्थान के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अर्पण जैन ‘अविचल’ ने कार्यक्रम में स्वागत उद्बोधन दिया। कार्यक्रम का संचालन अंशुल व्यास ने किया और आभार डॉ. अखिलेश राव ने व्यक्त किया। दूसरे सत्र में चयनित लघुकथाकारों ने लघुकथा पाठ किया। इनमें हरेराम वाजपेयी, सत्यनारायण मंगल, आशा मानधन्या, जयश्री भार्गव, सुरेखा सिसोदिया, कल्याणी गुप्ता, संध्या राणे, सुधाकर मिश्र, विजय सिंह चौहान, विनीता तिवारी, मनमोहन चौरे, डॉ. विद्यावती पाराशर, उषा अरविंद जोशी और शिशिर उपाध्याय शामिल थे। तृतीय सत्र में प्रेस क्लब के पूर्व अध्यक्ष अरविंद तिवारी, समाजसेवी सत्यनारायण गोयल और प्रेस क्लब के उपाध्यक्ष संजय त्रिपाठी ने लघुकथाकारों को पुरस्कृत किया। समापन सत्र की अध्यक्षता कर रहे अरविंद तिवारी ने कहा कि भाषाओं की सेवा आज बहुत आवश्यक है, और इंदौर में हो रहा यह कार्य निश्चित रूप से देशभर में रेखांकित हो रहा है। सत्यनारायण गोयल और संजय त्रिपाठी ने संस्थान को शुभकामनाएँ दीं और हिंदी अभियान की प्रशंसा की।

उपस्थित गणमान्य व्यक्ति

इस अवसर पर मातृभाषा उन्नयन संस्थान के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष नितेश गुप्ता, राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य डॉ. नीना जोशी, वरिष्ठ पत्रकार जयसिंह रघुवंशी, वीरेंद्र बीठरिया, देवेंद्र सिंह सिसौदिया, महेंद्र कुशवाह, पारस बिरला, ऋतु गुप्ता, ऋचा तिवारी, अली रजा शेख, तनिष्का भदौरिया, दिनेश तिवारी और लोकेश पाल सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति मौजूद रहे।