स्वतंत्रता दिवस समारोह में पहली बार ध्वजारोहण के दौरान राष्ट्रगीत वंदेमातरम की धुन और शब्द गूंजेंगे। राष्ट्रगीत के 150 वर्ष पूरे होने पर यह आयोजन राष्ट्रगान से ठीक पहले होगा। रक्षा मंत्रालय के निमंत्रण पत्रों पर वंदेमातरम के सभी छह छंद प्रकाशित हैं, जिसका उद्देश्य डेढ़ सौ साल बाद इसकी गूंज को नौजवानों तक पहुंचाना है। इस बीच, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 15 अगस्त को लाल किले से जेन-जी के सवालों, आकांक्षाओं और भविष्य को अपने संदेश में खास जगह देंगे। पीएमओ ने युवाओं से जुड़े मुद्दों पर मंत्रालयों से ब्योरा मांगा है, क्योंकि जंतर-मंतर आंदोलन और धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे ने सरकार की चिंता बढ़ाई है।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक मोहन भागवत गुरुवार को मुंबई में इंटरनेशनल मूवमेंट टू यूनाइट नेशंस (आईआईएमयूएन) द्वारा आयोजित युवा नेतृत्व सम्मेलन में भाग लेंगे। वे जेन-जी और जेन-अल्फा से नेतृत्व, राष्ट्र निर्माण और विश्व को एकजुट करने में भारत की भूमिका पर संवाद करेंगे। यह सम्मेलन आईआईएमयूएन के वार्षिक चैम्पियनशिप सम्मेलन की 15वीं वर्षगांठ का प्रतीक है, जिसमें देश के 100 से अधिक शहरों से 2,000 से अधिक छात्र शामिल होंगे।
मध्य प्रदेश में नीट परीक्षा विवाद के बाद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने जेन-जी छात्रों से जुड़ने के लिए एक अभियान शुरू किया है। भाजपा युवा मोर्चा नीट की तैयारी कर रहे छात्रों के घर जाकर उन्हें सरकार द्वारा पेपर लीक मामले में की गई कार्रवाई और भविष्य की व्यवस्थाओं से अवगत करा रहा है। छात्रों और उनके स्वजनों से फीडबैक तथा सुझाव एकत्र किए जा रहे हैं, जिन्हें केंद्रीय नेतृत्व को भेजा जाएगा। महिला मोर्चा भी छात्राओं से संवाद कर रही है। युवा मोर्चा अध्यक्ष श्याम टेलर के अनुसार, हाल ही में 100 सफल नीट छात्रों को सम्मानित किया गया है और इंटरनेट मीडिया के माध्यम से भी संपर्क किया जा रहा है।
प्रसिद्ध लेखक अमीश त्रिपाठी ने कहा है कि जेन-जी को विरोध प्रदर्शन का पूरा लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन यह हमेशा संविधान की सीमाओं के भीतर होना चाहिए। पुणे में अपनी नई बाल पुस्तक ‘ध्रुव-तारा: द ग्रेट इंडियन हिस्ट्री क्विज’ के प्रचार के दौरान उन्होंने कहा कि हर पीढ़ी ने आंदोलन किए हैं, इसलिए केवल जेन-जी को दोष देना उचित नहीं है। अमीश ने डॉ. आंबेडकर के ‘ग्रामर ऑफ अनार्की’ का जिक्र करते हुए संविधान की सर्वोच्चता पर जोर दिया। उन्होंने भारतीय इतिहास पढ़ाने के तरीके में बदलाव और औपनिवेशिक सोच को हटाने की भी बात कही, जिसका उनकी नई पुस्तक के माध्यम से प्रयास किया गया है।
कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के जंतर-मंतर पर हुए आंदोलन की सफलता की गूंज अब दुनिया भर में पहुंच गई है। नेपाल, श्रीलंका और पाकिस्तान जैसे देशों में, जो युवाओं के बड़े आंदोलनों के गवाह रहे हैं, सोशल मीडिया पर भारतीय जेन-जी की सराहना की जा रही है। पड़ोसी देशों के युवाओं ने मुद्दों को प्रभावी ढंग से उठाने और उन्हें अंजाम तक पहुंचाने की भारतीय जेन-जी की क्षमता की प्रशंसा की, साथ ही उनके गुस्से को जायज ठहराया। पाकिस्तान के एक कंटेंट क्रिएटर ने आंदोलनकारियों पर टिप्पणी भी की।