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2026-10-17

ग्वालियर में 105 जर्जर मकानों पर कार्रवाई विभागों के बीच अटकी

bulandsochnews Senior News Reporter

बुलंद सोच, ग्वालियर।

शहर में चिह्नित किए गए 211 जर्जर मकानों में से 105 पर कार्रवाई की प्रक्रिया दो विभागों के बीच उलझकर रह गई है। नगर निगम की भवन शाखा द्वारा जर्जर मकान चिह्नित कर नोटिस जारी किए गए हैं। हालांकि, अधिकतर मकानों में किराएदार कब्जे के लालच में रह रहे हैं। कार्रवाई के लिए संबंधित एसडीएम और तहसीलदार को नोटिस की प्रतियां भेजी जाती हैं, लेकिन इसके बाद कोई प्रभावी कार्यवाही नहीं होती है। जिला प्रशासन के अधिकारी भी इसे नगर निगम की जिम्मेदारी मानकर कोई कार्रवाई नहीं करते हैं।

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खतरे में खड़े जर्जर भवन

इसका परिणाम यह है कि शहर में जर्जर मकान खतरनाक स्थिति में खड़े हुए हैं। यह स्थिति तब है जब हाल ही में दिल्ली में इसी तरह एक इमारत ढह गई थी। वहीं, पिछले दिनों हुई वर्षा में नवग्रह कॉलोनी में भी एक मकान ढह गया था। निगम ने शहर के 25 जोन में कुल 211 जर्जर भवन चिह्नित किए हैं। इनमें से 104 भवनों को भवन मालिकों ने स्वयं हटा दिया है, जबकि नगर निगम की ओर से केवल दो भवन हटाए गए हैं। इसके बावजूद, 105 जर्जर भवन अभी भी मौजूद हैं, जिनसे हादसे का खतरा बना हुआ है। शहर के लश्कर इलाके में सबसे ज्यादा जर्जर भवनों की संख्या है। नया बाजार, दाल बाजार, लोहिया बाजार के अलावा कई अंदरूनी इलाकों और माधव प्लाजा के सामने भी कई भवन जर्जर अवस्था में खड़े हुए हैं। कई मामलों में तो नगर निगम का अमला पिछले दो वर्षों से सिर्फ नोटिस देकर इतिश्री कर रहा है। माधव प्लाजा के ठीक सामने थोराट साहब की गोठ में ऐसे चार मकान हैं, जिनको हटाने के बजाय सिर्फ नोटिस ही दिए जा रहे हैं।

जोन-वार स्थिति

जोन 15 में स्थिति सबसे गंभीर है, जहां 48 जर्जर भवन चिह्नित किए गए हैं। इनमें से 21 भवन हटाए जा चुके हैं, लेकिन 27 अभी भी शेष हैं। इसके बाद जोन दो में 22 जर्जर भवन मिले हैं, जिनमें से 10 भवन हटाए गए हैं और 12 अभी शेष हैं। जोन 19 में 17 भवन चिह्नित किए गए, जिनमें से 11 हटाए जा चुके हैं और छह बाकी हैं। इसी तरह, जोन 20 में 13 में से आठ, जोन छह में 12 में से आठ, जोन सात में 12 में से पांच तथा जोन 21 में 12 में से दो जर्जर भवन अभी मौजूद हैं। जोन नौ में 15 भवन चिह्नित हुए, जिनमें से पांच शेष हैं। जोन 13 में नौ में से छह और जोन चार में आठ में से पांच भवनों पर कार्रवाई बाकी है।

कार्रवाई में देरी के कारण

जो जर्जर मकान कार्रवाई के लिए शेष हैं, उनमें काफी समय से किराएदारों का कब्जा है। नगर निगम द्वारा मकानों को तोड़ने के लिए नोटिस तो जारी कर दिए जाते हैं, लेकिन किराएदारों को हटाने के लिए बेदखली की कार्रवाई जिला प्रशासन स्तर से होती है। चूंकि ऐसे मकानों से जनहानि की संभावना बनी रहती है, ऐसे में प्रशासन स्तर से ही बेदखली जरूरी होती है, लेकिन विभागों में आपसी सामंजस्य न होने की स्थिति में कार्रवाई नहीं हो पाती है। तहसीलदार मनीष जैन ने बताया कि उक्त मामले गंभीर प्रकृति के हैं जिनमें जन-धन की हानि संभावित है, किंतु इन मामलों में निर्णय की अंतिम अधिकारिता नगर निगम को होने से यदि निगम द्वारा विधिनुरूप आदेश कर लॉ एंड ऑर्डर के लिए मांग की जाएगी तो प्रशासन सदैव तत्पर है।

निगम आयुक्त का बयान

नगर निगम आयुक्त अभिषेक चौधरी ने कहा कि जो मकान काफी जर्जर अवस्था में हैं, उन्हें हटाने की कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने बताया कि यह विषय उनके संज्ञान में आया है, जिसको लेकर समीक्षा की जाएगी। जिन मकानों को हटाने की जरूरत है, वहां कार्रवाई की जाएगी।