बुलंद सोच, ग्वालियर।

ग्वालियर जिले में मानसून की शुरुआत भले ही धीमी रही हो, लेकिन बीते दिनों हुई संतुलित और समयबद्ध वर्षा ने कृषि क्षेत्र की तस्वीर बदल दी है। कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार, इस बार हुई वर्षा फसलों के लिए नपी-तुली और जरूरत के मुताबिक समय पर हुई है, जिससे ग्वालियर अंचल में खरीफ सीजन में अच्छे उत्पादन की पूरी संभावना बन गई है।
मानसून के शुरुआती दौर में कम वर्षा से किसान चिंतित थे, लेकिन अगस्त और सितंबर के शुरुआती हफ्तों में हुई वर्षा ने इस संकट को पूरी तरह टाल दिया है।
फसलों पर वर्षा का प्रभाव
कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉक्टर शैलेंद्र सिंह कुशवाह का कहना है कि फसलों की बढ़वार के अलग-अलग चरणों में पानी की जितनी आवश्यकता थी, ठीक उसी समय वर्षा हुई है। ग्वालियर, डबरा और भितरवार बेल्ट में बड़े पैमाने पर की जाने वाली धान की फसल के लिए यह वर्षा संजीवनी बनकर आई है। खेतों में पर्याप्त नमी होने से पौधों का फुटाव और बालियां बनने की प्रक्रिया बेहतर ढंग से हो रही है। साथ ही अब न तो रोग लगेंगे और न ही कीट का प्रकोप होगा। बाजरा, ज्वार, तिल, अरहर और मूंग जैसी फसलों के लिए भी यह वर्षा काफी फायदेमंद रही है। जलभराव न होने और रुक-रुक कर धूप-छांव का मौसम रहने से पौधों की वृद्धि संतुलित रही है।
कीट और रोगों में कमी
सामान्यतः अत्यधिक जलभराव या लंबे समय तक सूखा रहने पर फसलों में फंगस, तना छेदक और अन्य कीटों का हमला बढ़ जाता है। हालांकि, इस बार संतुलित वर्षा और बीच-बीच में चली हवाओं के कारण फसलों पर बीमारियों का प्रकोप काफी कम देखा जा रहा है। इससे किसानों का कीटनाशकों पर होने वाला अतिरिक्त खर्च बचेगा और उत्पादन लागत में कमी आएगी।
रबी सीजन के लिए शुभ संकेत
उप-संचालक भानु प्रकाश शर्मा का मानना है कि इस वर्षा का दोहरा फायदा जिले को मिलने जा रहा है। एक तरफ जहां खरीफ की पैदावार में उछाल आएगा, वहीं दूसरी तरफ कैचमेंट एरिया में जलभराव और भू-जल स्तर में सुधार होने से आगामी रबी सीजन में गेहूं, सरसों व चना की बोवनी के लिए भी जमीन में पर्याप्त नमी बनी रहेगी। कछौआ के किसान मुकेश पटेल के मुताबिक, यदि मौसम का यह अनुकूल मिजाज अगले कुछ हफ्तों तक ऐसे ही बना रहा, तो इस बार फसल का उत्पादन अच्छा होगा। उन्होंने पिछले साल धान की फसल कटने के समय हुई अधिक वर्षा से हुए नुकसान का जिक्र करते हुए आगामी समय में ऐसी स्थिति न होने की उम्मीद जताई।
फसल बोआई क्षेत्र
जिले में विभिन्न फसलों की बोआई का क्षेत्र इस प्रकार है: धान एक लाख हेक्टेयर, ज्वार 21 हजार हेक्टेयर, मक्का 200 हेक्टेयर, बाजरा 15 हजार हेक्टेयर, अरहर 100 हेक्टेयर, मूंग दो हजार हेक्टेयर और तिल दो हजार हेक्टेयर।

