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दिव्यांग शिक्षक MP- क्या एक मेडिकल बोर्ड दूसरे मेडिकल बोर्ड के सर्टिफिकेट को दोषी ठहरा पाएगा ?डॉक्टरों अधिकारियों की विश्वसनीयता पर सवाल

DPI आदेश

डॉक्टरों की इज्ज़त का पोस्टमार्टम दोबारा करने की कोशिश में शिक्षा विभाग


भोपाल-

मध्यप्रदेश में कोई भी भर्ती विवादों के बिना अछूती नही रही है। मध्यप्रदेश में शिक्षक भर्ती प्रक्रिया में नियुक्ति दिव्यांग शिक्षकों के प्रमाण पत्र पर  लोक शिक्षण संचालनालय द्वारा  संदेह व्यक्त किया जा रहा है। DPI को मेडिकल बोर्ड की जांच पर संदेह है इसलिए आयुक्त अनुभा श्रीवास्तव ने एक पत्र जारी कर मध्यप्रदेश के समस्त जिले के जिला शिक्षा अधिकारी को निर्देशित किया है कि जिले के मुख्य चिकित्सा अधिकारी से मिलकर नवनियुक्ति दिव्यांग शिक्षकों की मेडिकल बोर्ड गठित कर दोबारा जांच हो।

आखिर यह कैसा आदेश है इस आदेश का मतलब यह हुआ कि जिस मेडिकल बोर्ड के डॉक्टरों अधिकारियों ने पूर्व में जो  दिव्यांग प्रमाण पत्र वितरित किए हैं वो झूंठे है? अब यदि नई मेडिकल बोर्ड समिति गठित होती है तो क्या  वह दिव्यांग अभ्यर्थियों के साथ ही अपने ही अधिकारियों डॉक्टरों की विश्वनीयता पर सवाल खड़े करेगी? ।  सरकार को चाहिए था कि डॉक्टरों अधिकारियों की विश्वसनीयता पर सवाल खड़ा करने के बजाय दिव्यांग प्रमाण पत्र की सत्यता की जांच करे कि संबंधित दिव्यांग क्या उक्त मेडिकल बोर्ड के सामने उपस्थित था कि नही।

दोबारा मेडिकल बोर्ड को जांचने के आदेश देने से स्वास्थ्य विभाग की  साख पर बट्टा लगना लाजमी है फिर से कोई भी मध्यप्रदेश का विभाग एक दूसरे पर कैसे विश्वास कर सकता है जब शिक्षा विभाग दिव्यांग प्रमाण पत्र की सत्यता पर संदेह कर रहा है।