बुलंद सोच।

करोंद इलाके में देवकी नगर सब्जी मंडी के पीछे बिजली चोरी कर चल रहे एक अवैध ई-रिक्शा चार्जिंग स्टेशन का खुलासा हुआ है। यह स्टेशन मोहम्मद अशफाक खां के दो मंजिला मकान में संचालित हो रहा था।
बिजली कंपनी की टीम ने पाया कि ट्रांसफॉर्मर से ही दो अलग-अलग सर्किट में कनेक्शन खींचकर करीब 20 फीट लंबी केबल पाइप के जरिए जमीन के नीचे से घर के अंदर तक पहुंचाई हुई थी। यह व्यवस्था इसलिए की गई थी ताकि सामान्य जांच में यह कनेक्शन आसानी से नजर न आए।
कार्रवाई के दौरान ग्राउंड फ्लोर पर 9 फीट ऊंचे और करीब 4 फीट चौड़े दो शटर खोलने पर अंदर 20×40 फीट का बड़ा हॉल मिला। इस हॉल में 12 ई-रिक्शा चार्जिंग पॉइंट बनाए गए थे और दबिश के समय 6 ई-रिक्शा चार्ज होते मिले।
जांच में सामने आया कि परिसर में दुकान के नाम से एक गैर-घरेलू यानी कमर्शियल और एक घरेलू वैध बिजली कनेक्शन भी लिया गया था, लेकिन चार्जिंग स्टेशन चलाने के लिए इनका इस्तेमाल नहीं किया जा रहा था।
बिजली कंपनी ने प्रारंभिक आकलन के आधार पर उपभोक्ता पर करीब 9 लाख रुपए की बिलिंग की है। आगे की कार्रवाई नियमानु की जा रही है।
करोंद जोन के मैनेजर महेश कोली के मुताबिक, यह पहला मामला नहीं है। करीब एक साल पहले भानपुर क्षेत्र में किराए के मकान में चल रहे ऐसे ही एक अवैध ई-रिक्शा चार्जिंग स्टेशन पर भी बिजली कंपनी ने कार्रवाई की थी। वहां एक साथ 10 ई-रिक्शा चार्ज होते मिले थे और करीब 10 लाख रुपए की बिलिंग की गई थी।
एसई प्रदीप सिंह चौहान ने बताया कि बिजली चोरी के लिए सीधे ट्रांसफार्मर से कनेक्शन लेना गंभीर मामला है। ऐसे मामलों में टीमों को विशेष रूप से उन स्थानों पर नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं, जहां बड़ी संख्या में ई-रिक्शा एक साथ चार्ज किए जा रहे हैं।
पूर्व विद्युत लोकपाल एमएस अत्रे के मुताबिक, एक ई-रिक्शा को नियमित रूप से चार्ज करने में लगने वाली बिजली को यदि दर्जनों वाहनों के व्यावसायिक चार्जिंग कारोबार से जोड़ दिया जाए, तो यह केवल बिजली के अनधिकृत इस्तेमाल का मामला नहीं बनता, बल्कि बिजली चोरी के साथ-साथ ट्रांसफार्मर ओवरलोड और स्थानीय फॉल्ट का भी बड़ा जोखिम बन सकता है।

