मध्य प्रदेश में मानसून की सुस्त रफ्तार के कारण बिजली संकट गहरा गया है। पर्याप्त बारिश न होने से बांधों में जलस्तर कम हो गया है, जिससे जलविद्युत उत्पादन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। राज्य में प्रतिदिन 13 से 14 हजार मेगावाट तक पहुंच रही बिजली की मांग को पूरा करने में कंपनियों को भारी मशक्कत करनी पड़ रही है। सामान्य स्थिति की तुलना में 2400 से 2500 मेगावाट बिजली का उत्पादन कम हो गया है। इस कमी की भरपाई के लिए ताप विद्युत संयंत्रों और बाहर से बिजली खरीदने पर निर्भरता बढ़ गई है, जिसके लिए मप्र पावर मैनेजमेंट कंपनी करीब दस रुपये प्रति यूनिट की दर से बिजली क्रय कर रही है।
मध्य प्रदेश के 2 करोड़ से अधिक बिजली उपभोक्ताओं को जुलाई के बिल में अतिरिक्त शुल्क का सामना करना पड़ेगा। मध्य प्रदेश विद्युत नियामक आयोग ने फ्यूल एंड पावर परचेज एडजस्टमेंट सरचार्ज (एफपीपीएएस) को 1.11 प्रतिशत से बढ़ाकर 3.77 प्रतिशत कर दिया है। इससे 200 से 300 यूनिट बिजली उपयोग करने वाले उपभोक्ताओं के बिल में लगभग 35 से 87 रुपये की वृद्धि हो सकती है। एमपी पावर मैनेजमेंट कंपनी के शैलेंद्र सक्सेना ने बताया कि यह वृद्धि बिजली खरीद की वास्तविक लागत और स्वीकृत लागत के अंतर के कारण हुई है, क्योंकि राज्य में बिजली की मांग बढ़ रही है और जलविद्युत उत्पादन प्रभावित हुआ है।