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मध्य प्रदेश में पीएनजी अपनाने की धीमी रफ्तार: 31 मई 2026 तक 3.36 लाख घरेलू कनेक्शन

मध्य प्रदेश में पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) को अपनाने की रफ्तार धीमी बनी हुई है, हाल ही में हुए एलपीजी संकट के बावजूद। पेट्रोलियम एंड नेचुरल गैस रेगुलेटरी बोर्ड के 31 मई 2026 तक के आंकड़ों के अनुसार, राज्य में केवल 3,36,953 घरेलू पीएनजी कनेक्शन हैं, जिससे यह राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 8वें स्थान पर है। इंदौर और उज्जैन में सर्वाधिक 1,35,095 कनेक्शन हैं, जबकि राजधानी भोपाल में मात्र 39,432 कनेक्शन हैं। महाराष्ट्र जैसे राज्य 47.42 लाख कनेक्शनों के साथ शीर्ष पर हैं, जो मध्य प्रदेश से काफी आगे हैं।

मध्य प्रदेश में अगले पांच साल के बिजली टैरिफ की प्रक्रिया शुरू, लाइन लॉस बढ़ने का प्रस्ताव

मध्य प्रदेश में 1 अप्रैल 2027 से लागू होने वाले अगले पांच साल के बिजली टैरिफ निर्धारण की प्रक्रिया शुरू हो गई है। मप्र पावर मैनेजमेंट कंपनी ने पूर्व क्षेत्र और मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनियों के लिए लाइन लॉस बढ़ाने का प्रस्ताव मप्र विद्युत नियामक आयोग को भेजा है। आयोग ने प्रस्तावित नियम-शर्तों पर उपभोक्ताओं से 1 सितंबर तक सुझाव और आपत्तियां मांगी हैं। विशेषज्ञों ने लगभग 20 हजार करोड़ रुपये के निवेश के बावजूद लाइन लॉस बढ़ने की संभावना पर चिंता व्यक्त की है, जिससे उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त बोझ पड़ने की आशंका है। अंतिम टैरिफ आदेश ही वास्तविक प्रभाव तय करेगा।

सारणी ताप विद्युत गृह में 660 मेगावाट की नई इकाई की तैयारी तेज, पर्यावरण मंत्रालय को डीपीआर भेजी

मध्य प्रदेश पावर जनरेटिंग कंपनी (एमपीपीजीसीएल) सारणी ताप विद्युत गृह में 660 मेगावाट की एक अतिरिक्त इकाई स्थापित करने की तैयारी में तेजी ला रही है। इसकी विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय को पर्यावरणीय स्वीकृति के लिए भेजी गई है। मंजूरी मिलने के बाद प्रस्ताव सरकार को भेजा जाएगा, जो परियोजना के अंतिम स्वरूप पर निर्णय लेगी। एमपीपीजीसीएल के डायरेक्टर टेक्निकल सुबोध निगम के अनुसार, कंपनी परियोजना को जल्द से जल्द धरातल पर लाना चाहती है।

ग्वालियर में शनिवार को चार घंटे बिजली कटौती

ग्वालियर के नगर संभाग उत्तर और केंद्रीय क्षेत्रों में शनिवार को सुबह 10 बजे से दोपहर 2 बजे तक चार घंटे की बिजली कटौती रहेगी। यह कटौती विद्युत रखरखाव कार्य के कारण होगी, जिससे कई आवासीय कॉलोनियां और औद्योगिक क्षेत्र प्रभावित होंगे। अमरकंटक, लोहामंडी, श्रुति इन्क्लेव, सेवानगर फीडर से जुड़े क्षेत्रों के साथ चिरवाई सब स्टेशन से निकलने वाले फीडरों से संबंधित औद्योगिक क्षेत्र भी प्रभावित रहेंगे।

ताप विद्युत घरों में कोयला भंडार आधा से भी कम, रबी सीजन में बिजली संकट की आशंका

मध्य प्रदेश पावर जनरेटिंग कंपनी के ताप विद्युत घरों में कोयले का भंडार तेजी से घटने से आगामी रबी सीजन में बिजली उत्पादन और आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका है। विशेषज्ञों के अनुसार, वर्तमान कोयला स्टॉक पिछले वर्ष की तुलना में आधे से भी कम है। सेवानिवृत्त अतिरिक्त मुख्य अभियंता राजेंद्र अग्रवाल ने बताया कि जुलाई 2025 के अंत में 11.27 लाख मीट्रिक टन कोयला उपलब्ध था, जो इस वर्ष घटकर 4.92 लाख मीट्रिक टन रह गया है। सिंगाजी ताप विद्युत गृह में केवल 4.5 दिन का कोयला बचा है, जिसे केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण ने ‘क्रिटिकल’ श्रेणी में रखा है।

मध्य प्रदेश में बिजली संकट गहराया, बांधों में जलस्तर घटने से उत्पादन प्रभावित

मध्य प्रदेश में मानसून की सुस्त रफ्तार के कारण बिजली संकट गहरा गया है। पर्याप्त बारिश न होने से बांधों में जलस्तर कम हो गया है, जिससे जलविद्युत उत्पादन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। राज्य में प्रतिदिन 13 से 14 हजार मेगावाट तक पहुंच रही बिजली की मांग को पूरा करने में कंपनियों को भारी मशक्कत करनी पड़ रही है। सामान्य स्थिति की तुलना में 2400 से 2500 मेगावाट बिजली का उत्पादन कम हो गया है। इस कमी की भरपाई के लिए ताप विद्युत संयंत्रों और बाहर से बिजली खरीदने पर निर्भरता बढ़ गई है, जिसके लिए मप्र पावर मैनेजमेंट कंपनी करीब दस रुपये प्रति यूनिट की दर से बिजली क्रय कर रही है।

मध्य प्रदेश में बिजली उपभोक्ताओं को झटका, जुलाई बिल में बढ़ा एफपीपीएएस सरचार्ज

मध्य प्रदेश के 2 करोड़ से अधिक बिजली उपभोक्ताओं को जुलाई के बिल में अतिरिक्त शुल्क का सामना करना पड़ेगा। मध्य प्रदेश विद्युत नियामक आयोग ने फ्यूल एंड पावर परचेज एडजस्टमेंट सरचार्ज (एफपीपीएएस) को 1.11 प्रतिशत से बढ़ाकर 3.77 प्रतिशत कर दिया है। इससे 200 से 300 यूनिट बिजली उपयोग करने वाले उपभोक्ताओं के बिल में लगभग 35 से 87 रुपये की वृद्धि हो सकती है। एमपी पावर मैनेजमेंट कंपनी के शैलेंद्र सक्सेना ने बताया कि यह वृद्धि बिजली खरीद की वास्तविक लागत और स्वीकृत लागत के अंतर के कारण हुई है, क्योंकि राज्य में बिजली की मांग बढ़ रही है और जलविद्युत उत्पादन प्रभावित हुआ है।