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मध्यप्रदेश में डॉक्टरों की योग्यता पर लोक शिक्षण संचालनालय ने उठाया सवाल ,आदेश जारी

मध्यप्रदेश शिक्षक भर्ती
शिक्षा विभाग और स्वास्थ्य विभाग शिक्षक भर्ती प्रक्रिया में आमने सामने

भोपाल-

मध्यप्रदेश में  शिक्षक भर्ती प्रक्रिया 2018 में शुरू हुई थी लेकिन वह आजतक पूरी नही हो पायी है ।वर्ग 1 व वर्ग दो में भर्ती प्रक्रिया सम्पन्न होने के बाद भी बहुत से पद बचे हुए हैं लेकिन सरकार शेष बचे हुए पदों को भरने के मूड में नही है। वर्ग 3 की भर्ती प्रक्रिया अभी भी शुरू है।

लोक शिक्षण संचालनालय की आयुक्त अनुभा श्रीवास्तव ने 13 जून को एक पत्र जारी किया है कि दिव्यांग कोटे से शिक्षक बने वर्ग1,2,3 के अभ्यर्थियों की दोबारा जांच स्वास्थ्य विभाग करे।

गौरतलब है कि वर्ग 3 की भर्ती प्रक्रिया में दिव्यांग कोटे की 750 सीटों में मुरैना जिले के 450 लोगों का चयन हुआ ,गड़बड़ी की आशंका के चलते हुए जब जांच कराई गई तो 77 शिक्षक फ़र्जी दिव्यांग सर्टिफिकेट पर  नौकरी पाई थी   DPI ने उन्हें बर्खास्त कर FIR करने के निर्देश दिए ।

अब प्रश्न यह उठता है कि क्या स्वास्थ्य विभाग अपने ही उन डॉक्टरों को अयोग्य घोषित करे जिन्होंने ने दिव्यांग सर्टिफिकेट बनाया ? इससे तो पूरे देश मे स्वास्थ्य विभाग मध्यप्रदेश व सरकार की बदनामी भी हो सकती है कि मध्यप्रदेश में अयोग्य डॉ हैं । 

स्वास्थ्य विभाग मध्यप्रदेश सरकार को चाहिए कि उन सभी अभ्यर्थियों के रिकॉर्ड की जांच करे कि वो रजिस्टर्ड हैं कि नही। यदि सभी जिलों के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी पुनः दिव्यांग  अभ्यर्थियों की शारीरिक क्षमता की जांच करते हैं तो अपने ही विभाग के डॉक्टरों अधिकारियों को संदेह के घेरे में लाएंगे। ,बहरहाल मध्यप्रदेश शिक्षा विभाग और स्वास्थ्य विभाग दिव्यांग प्रकरण पर आमने सामने हैं।