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2026-10-17

एनसीईआरटी की क्षेत्रीय शिक्षा संस्थान भोपाल 60 वर्षों से कर रहा शिक्षक प्रशिक्षण, राष्ट्रीय शिक्षा नीति के मास्टर ट्रेनर तैयार

bulandsochnews Senior News Reporter

बुलंद सोच, भोपाल।

शिक्षा की नींव मजबूत करने में शिक्षक की भूमिका महत्वपूर्ण होती है, और इसी दिशा में राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) की प्रमुख इकाई क्षेत्रीय शिक्षा संस्थान (RIE), भोपाल पिछले छह दशकों से महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है। श्यामला हिल्स में स्थित यह संस्थान आज मध्य भारत ही नहीं, बल्कि पूरे देश में शिक्षकों को प्रशिक्षण देने, नए शोध करने और पढ़ाई-लिखाई में नए तरीके अपनाने का एक बड़ा केंद्र बन चुका है। यह संस्थान 100 एकड़ से भी अधिक बड़े क्षेत्र में फैला हुआ है, जिसमें सेंट्रल लाइब्रेरी, विज्ञान और गणित की प्रयोगशालाएं, एजुकेशनल टेक्नोलॉजी लैब, छात्रावास, खेल के मैदान, इंडोर स्पोर्ट्स सेंटर, जिम और एक बड़ा मल्टीपर्पस हॉल जैसी कई आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध हैं।

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स्थापना और विस्तार

आरआईई भोपाल की शुरुआत वर्ष 1963 में हुई थी। भारत सरकार ने देश के विभिन्न क्षेत्रों में स्कूली शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार लाने और मानक शिक्षक प्रशिक्षण प्रदान करने के उद्देश्य से क्षेत्रीय शिक्षा महाविद्यालय स्थापित किए थे। बाद में, वर्ष 1995 में पुनर्गठन के बाद इसका नाम बदलकर क्षेत्रीय शिक्षा संस्थान (RIE) कर दिया गया। वर्तमान में, आरआईई भोपाल मध्य प्रदेश के साथ-साथ छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, गुजरात, गोवा और दादरा एवं नगर हवेली तथा दमन एवं दीव जैसे क्षेत्रों की शैक्षणिक आवश्यकताओं की पूर्ति में योगदान दे रहा है।

शिक्षक प्रशिक्षण और पाठ्यक्रम

आरआईई भोपाल का कार्य केवल उन छात्रों को पढ़ाना नहीं है जो शिक्षक बनना चाहते हैं, बल्कि यह पहले से कार्यरत शिक्षकों को भी लगातार बेहतर बनाने के लिए प्रशिक्षण प्रदान करता है। यहां चार वर्षीय एकीकृत बी.एससी-बी.एड और बी.ए-बी.एड, दो वर्षीय बी.एड और एम.एड, तीन वर्षीय बी.एड-एम.एड, गाइडेंस और काउंसलिंग में डिप्लोमा, और शिक्षा में पी.एच.डी. जैसे कई पाठ्यक्रम संचालित किए जाते हैं। यह संस्थान चार वर्षीय एकीकृत शिक्षक शिक्षा कार्यक्रम को बढ़ावा देने वाले प्रमुख संस्थानों में से एक रहा है। नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) में भी इस चार वर्षीय पाठ्यक्रम को अत्यंत महत्वपूर्ण और आवश्यक माना गया है।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति के मास्टर ट्रेनर

आरआईई भोपाल कार्यरत शिक्षकों के लिए समय-समय पर रिफ्रेशर कोर्स, कार्यशालाएं और सेमिनार आयोजित करता है। राष्ट्रीय पाठ्यक्रम फ्रेमवर्क (NCF) और नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए यहां मास्टर ट्रेनर्स (मुख्य प्रशिक्षक) भी तैयार किए जाते हैं। इसके अतिरिक्त, शिक्षकों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), डिजिटल तकनीक, स्मार्ट क्लास का संचालन, प्रयोगशाला में शिक्षण, समावेशी शिक्षा (सभी को साथ लेकर पढ़ाना) और विशेष आवश्यकताओं वाले बच्चों को पढ़ाने जैसे विषयों पर प्रशिक्षण दिया जाता है। इस संस्थान के माध्यम से अब तक बड़ी संख्या में शिक्षकों को प्रशिक्षित किया जा चुका है।

डेमोंस्ट्रेशन मल्टीपर्पस स्कूल

आरआईई परिसर में संचालित ‘डेमोंस्ट्रेशन मल्टीपर्पस स्कूल’ (DMS) भविष्य के शिक्षकों के लिए एक ‘लाइव लैब’ के रूप में कार्य करता है। यहां शिक्षक बनने वाले छात्र बच्चों को ध्यान में रखकर पढ़ाने के नए तरीकों, पढ़ाई की सामग्री (TLM) और व्यावहारिक शिक्षा का सीधा अभ्यास करते हैं। सीबीएसई बोर्ड से संबद्ध यह स्कूल नई-नई तकनीकों से पढ़ाने, खेलकूद और कला को पढ़ाई से जोड़ने के लिए एक मॉडल (आदर्श) स्कूल के रूप में जाना जाता है।

शिक्षा नीति और पाठ्यक्रम निर्माण में योगदान

आरआईई भोपाल का कार्य केवल कक्षाएं संचालित करने और प्रशिक्षण देने तक ही सीमित नहीं है। यह संस्थान राज्यों के शिक्षा विभागों, एससीईआरटी (SCERT) और डीआईईटी (DIET) के साथ मिलकर पाठ्यक्रम में संशोधन करने, नई पाठ्यपुस्तकें बनाने और शिक्षकों के लिए गाइड बुक तैयार करने में सहायता करता है। बच्चों के सीखने के स्तर, पढ़ाई छोड़ने वाले छात्रों और स्कूली शिक्षा से जुड़ी विभिन्न समस्याओं पर किए गए शोध भी शिक्षा व्यवस्था को सुधारने और नए नियम-नीतियां बनाने में अत्यंत उपयोगी सिद्ध होते हैं। इस प्रकार, आरआईई भोपाल ने पिछले 60 से अधिक वर्षों में केवल शिक्षक तैयार करने का कार्य ही नहीं किया है, बल्कि पढ़ाई में नई खोजों, नए प्रयोगों और नीतियां बनाने में अपनी भूमिका को लगातार बढ़ाया है।