बुलंद सोच, श्योपुर।

श्योपुर जिले के जंगलों में हथियारबंद बदमाशों का आतंक खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है। जबकि चंबल क्षेत्र में डकैतों के एनकाउंटर और आत्मसमर्पण के बाद डकैती की समस्या भले ही समाप्त हो गई हो। जिले में पिछले दिनों कराहल इलाके में आदिवासियों को बंधक बनाकर लूटने की घटना हुई थी। इसके बाद विजयपुर इलाके के गसवानी थाना क्षेत्र के जंगल में एक पशु चरवाहे से बंदूक और मोबाइल लूटने की वारदात को अंजाम दिया गया था। पुलिस ने इस मामले में एक आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है, लेकिन उसके तीन साथी अभी भी फरार हैं। इसके अतिरिक्त, जंगल में 8-10 और बदमाश अलग-अलग गिरोह बनाकर घूम रहे हैं।
पुलिस का सघन तलाश अभियान
पुलिस अधीक्षक (एसपी) मोती उर रहमान ने थाना प्रभारियों को इन बदमाशों की धरपकड़ के निर्देश दिए हैं। जिले भर के करीब 8 थानों के 50 से अधिक पुलिसकर्मी दिन-रात जंगल में सर्चिंग करने और बदमाशों की गतिविधियों का पता लगाने में जुटे हुए हैं। हालांकि, अभी तक बदमाशों का कोई सुराग नहीं लग सका है। पुलिस श्योपुर जिले से लगे राजस्थान के सीमावर्ती इलाकों से लेकर मुरैना, भिंड और धौलपुर तक के पंजीकृत बदमाशों के बारे में भी जानकारी जुटा रही है, ताकि उनकी पृष्ठभूमि और उनके संपर्कों का पता लगाया जा सके।
पुलिस के लिए चुनौती और जन सहयोग की अपील
जंगल में बदमाशों की आवाजाही और पिछले दिनों हुई लूटपाट व मारपीट जैसी घटनाओं के बाद इनकी गिरफ्तारी पुलिस के लिए एक बड़ी चुनौती बन गई है। जंगल बहुत बड़ा और घना है, और बदमाशों ने जंगल के रास्ते देख रखे हैं, इस वजह से जब भी पुलिस जंगल में दबिश देती है, तब हर बार वे एक जगह से दूसरी जगह चले जाते हैं, जिससे वे पुलिस के हाथ नहीं लग पाते। पुलिस का मानना है कि जंगल में खिरकाई लगाकर रह रहे पशु चरवाहे यदि बदमाशों की आवाजाही की जानकारी फोन या दूसरे माध्यमों से पुलिस को दे दें, तो बदमाशों को गिरफ्तार करने में पुलिस को ज्यादा वक्त नहीं लगेगा। बदमाश पशुपालकों को ही परेशान करते हैं, उनसे रसद (सामान) की वसूली करते हैं, इसके बावजूद वे डर के मारे पुलिस को कुछ नहीं बताते, जिससे बदमाशों तक पहुंचने में पुलिस को वक्त लग रहा है। एसपी मोती उर रहमान ने बताया कि हमारी टीमें लगातार जंगल में सर्चिंग कर रही हैं, और हमारी टीमें हर पहलू को ध्यान में रखकर बदमाशों की तलाश कर रही हैं।

