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2026-10-17

मुख्यमंत्री निवास सुरक्षा घेरे के 500 मीटर दायरे में सिर्फ दो पुलिस कैमरे चालू

bulandsochnews Senior News Reporter

बुलंद सोच, भोपाल।

भोपाल स्थित मुख्यमंत्री निवास, जो शहर का सबसे संवेदनशील और कड़ा सुरक्षा घेरा माना जाता है, के 500 मीटर के दायरे में निगरानी व्यवस्था सवालों के घेरे में है। इस पूरे क्षेत्र में पुलिस के केवल दो कैमरे ही चालू हैं। पॉलिटेक्निक चौराहे से लेकर राजा भोज सेतु तक निगरानी के बीच कई अहम हिस्से ऐसे हैं, जहां कैमरे बंद पड़े हैं या हटा दिए गए हैं। मुख्यमंत्री निवास से सटे दूरदर्शन केंद्र और आकाशवाणी केंद्र के कैमरे भी लंबे समय से बंद पड़े हैं। पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण बोट क्लब पर भी सिर्फ एक कैमरा ही चालू है। इसका अर्थ है कि जिस इलाके में हर गतिविधि पर नजर होनी चाहिए, वहां कैमरों की निगरानी अधूरी है।

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कैमरों की कमी और पुलिस के सामने चुनौती

इस अपर्याप्त निगरानी का असर यह है कि संवेदनशील इलाके में किसी भी वारदात के बाद पुलिस के सामने आरोपितों तक पहुँचने के लिए आवश्यक इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य का संकट खड़ा हो जाता है। बदमाश वारदात कर फरार हो जाते हैं, और पुलिस को उनके आने-जाने का मार्ग खंगालने के लिए अन्य स्रोतों पर निर्भर रहना पड़ता है। मुख्यमंत्री निवास की ओर आने वाले प्रमुख मार्गों पर कैमरों की स्थिति देखें तो पॉलिटेक्निक चौराहे पर लगे कैमरे चालू हैं, जिसके बाद सीधे राजा भोज सेतु पर कैमरे चालू मिलते हैं। इन दोनों स्थानों के बीच निगरानी का एक बड़ा गैप है। किलोल पार्क पर लगे कैमरे पहले बंद हुए और बाद में उन्हें हटा दिया गया; यह स्थान मुख्यमंत्री निवास की ओर जाने वाले सीधे मार्ग पर स्थित है। वीवीआईपी इलाके में कैमरे लगाने के बाद उनकी नियमित निगरानी, रखरखाव और खराब होने पर तत्काल सुधार की व्यवस्था पर सवाल उठते हैं।

संवेदनशील क्षेत्र में हुई वारदातें

मुख्यमंत्री निवास से महज 200 मीटर दूर घर के सामने फायरिंग का मामला हो या पूर्व मुख्यमंत्री के आवास के सामने कार में तोड़फोड़ की वारदात, शहर के इस सबसे संवेदनशील क्षेत्र में पुलिस को चुनौती देने वाले दोनों मामलों में आरोपित अब तक गिरफ्त से बाहर हैं। करीब एक साल पहले पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती के घर के सामने बदमाशों ने एक कार में तोड़फोड़ की थी। इस मामले में पूरे मार्ग पर पुलिस कैमरों की पर्याप्त कवरेज नहीं होने के कारण आरोपितों को ट्रेस करने में पुलिस को मदद नहीं मिल सकी और वे अब तक फरार हैं। इसी तरह, मुख्यमंत्री निवास से करीब 200 मीटर दूर एक घर के सामने बदमाशों ने फायरिंग की थी। इस वारदात के बाद पुलिस ने आरोपितों की तलाश की, लेकिन घटनास्थल से ऐसा सीसीटीवी फुटेज नहीं मिल सका, जिससे आरोपितों की पहचान या उनके भागने के रास्ते का पता चल सके।

हालिया घटना: सीएम हाउस के करीब गार्ड को धमकाया

मुख्यमंत्री निवास से कुछ ही दूरी पर पिस्टल लहराकर गार्ड को धमकाने की हालिया घटना ने एक बार फिर इस सुरक्षा घेरे की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यह घटना मुख्यमंत्री निवास से महज 200 मीटर दूर नादिर कॉलोनी में 17-18 सितंबर की दरमियानी रात करीब 1:30 बजे हुई। कार सवार बदमाशों ने सुरक्षा गार्ड अश्वनी को पिस्टल दिखाकर धमकाया। रात में कॉलोनी का गेट खोलने से गार्ड अश्वनी ने मना किया तो बदमाश लौट गए। कुछ देर बाद वे दोबारा पहुँचे और उनमें से एक ने लोडेड पिस्टल निकालकर गार्ड को धमकाया, जिसके बाद आरोपित मौके से फरार हो गए। पूरी घटना कॉलोनी के मुख्य गेट पर लगे सीसीटीवी कैमरों में रिकॉर्ड हुई है। कॉलोनी एसोसिएशन ने फुटेज पुलिस को उपलब्ध कराया है, और पुलिस कार तथा उसमें सवार लोगों की पहचान कर रही है। हालांकि, घटना के बाद अब तक आरोपितों की गिरफ्तारी नहीं हुई है।

वीवीआईपी क्षेत्र में कैमरों का महत्व

मुख्यमंत्री निवास के आसपास का इलाका केवल वीवीआईपी आवाजाही के लिहाज से ही नहीं, बल्कि होटल जहाँनुमा, दूरदर्शन, आकाशवाणी और अन्य महत्वपूर्ण संस्थानों के कारण भी संवेदनशील है। ऐसे क्षेत्र में कैमरों का बंद होना केवल तकनीकी खराबी का मामला नहीं माना जा सकता। कैमरे वारदात रोकने के साथ-साथ वारदात के बाद आरोपितों की पहचान और उनके मार्ग की पड़ताल में अहम भूमिका निभाते हैं। ऐसे में, 500 मीटर के सुरक्षा घेरे में ही निगरानी के खाली हिस्से सुरक्षा व्यवस्था की गंभीर कमजोरी को सामने ला रहे हैं।