श्योपुर में जंगल से अतिक्रमण हटाने गई वन विभाग की टीम पर भीड़ ने हमला कर दिया। खाड़ी वन रेंज के मोरेका गांव के पास हुई इस घटना में हमलावरों ने पथराव किया और लाठी-डंडों से वनकर्मियों को पीटा। बीट गार्ड और वनपाल चोटिल हुए, जबकि एक वाहन के शीशे टूट गए। टीम को मौके से भागना पड़ा। भू-माफिया ने करीब पांच हजार बीघा जंगल साफ कर दिया था और कटे पेड़ों को जला रहे थे। एक साल पहले भी इसी तरह का हमला हुआ था। पुलिस ने वन विभाग की रिपोर्ट पर कार्रवाई शुरू कर दी है।
कूनो नेशनल पार्क से करीब 10 दिन पहले बाहर निकला एक चीता मानपुर और सोंईकलां इलाके में है। यह जंगल वापस लौटना चाह रहा है, लेकिन रास्ते में इंसानी भीड़ और शोर-शराबे के कारण भयभीत होकर बार-बार रास्ता बदल रहा है। चीता ट्रेकिंग टीम उस पर लगातार नजर रख रही है। कांवड़ यात्रा के दौरान और किसानों द्वारा खदेड़े जाने के बाद उसने अपना रास्ता बदला। पिछले तीन दिनों से उसने कोई शिकार नहीं किया है, जिससे क्षेत्र के किसान डरे हुए हैं और खेतों में जाने से बच रहे हैं।
मध्य प्रदेश के श्योपुर जिले के आवदा कस्बे में स्थित सांई पब्लिक स्कूल में बच्चों को शटरिंग लगे निर्माणाधीन कमरे में बांस-बल्लियों के बीच पढ़ाया जा रहा है। इस खतरनाक लापरवाही का वीडियो वायरल होने के बाद NSUI ने स्कूल प्रबंधन और शिक्षा विभाग पर सवाल उठाए हैं। NSUI ने बच्चों की जान जोखिम में डालने वाले इस स्कूल की मान्यता तुरंत रद्द करने की मांग की है। मामले का संज्ञान लेते हुए जिला पंचायत सीईओ सौम्या आनंद ने निष्पक्ष जांच का आश्वासन दिया है और कहा है कि जांच रिपोर्ट के आधार पर दोषियों के खिलाफ वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
कूनो नेशनल पार्क के गेट मानसून के लिए बंद होने के बावजूद चीते रहवासी इलाकों, खेतों और सड़कों पर देखे जा रहे हैं। पार्क में कुल 49 चीते हैं, जिनमें से 19 खुले जंगल में हैं और नौ गांवों के आसपास दिखते हैं। श्योपुर, बड़ौदा और राजस्थान के कई इलाकों में भी इनकी मौजूदगी दर्ज की गई है। पिछले तीन वर्षों में चीतों द्वारा इंसानों पर हमले की कोई घटना नहीं हुई है, लेकिन पालतू जानवरों के शिकार से पशुपालकों में असंतोष है, जिसके लिए मुआवजे का प्रावधान है। कूनो डीएफओ आर. थिरुकुराल के अनुसार, वन विभाग की ट्रेकिंग टीमें चीतों पर लगातार नज़र रख रही हैं।