एमसीयू में नशे के विरुद्ध जागरूकता को लेकर आयोजित हुआ विशेष व्याख्यान,सशस्त्र सुरक्षा बल के सेकंड इन कमांड ने मुख्य अतिथि के रूप में कार्यक्रम में दिया वक्तव्य

एमसीयू में नशे के विरुद्ध जागरूकता को लेकर आयोजित हुआ विशेष व्याख्यान,सशस्त्र सुरक्षा बल के सेकंड इन कमांड ने मुख्य अतिथि के रूप में कार्यक्रम में दिया वक्तव्य
एमसीयू में नशे के विरुद्ध जागरूकता को लेकर आयोजित हुआ विशेष व्याख्यान,सशस्त्र सुरक्षा बल के सेकंड इन कमांड ने मुख्य अतिथि के रूप में कार्यक्रम में दिया वक्तव्य

श्रोता छात्रों,एमसीयू के प्राध्यापकों एवं कार्यक्रम से जुड़े लोगों को कई रोचक जानकारियों से कराया रूबरू, जागरूकता अभियान को बढ़ाने की अपील

बुलंदसोच,भोपाल।

माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय के भोपाल कैम्पस में आजादी के अमृत महोत्सव के अंतर्गत ड्रग एब्यूज इन इंडिया एंड दी वल्नेरेबिलिटी ऑफ यूथ विषय पर विशेष व्याख्यान का आयोजन किया गया।जिसमें मुख्य वक्ता के रूप में सशस्त्र सुरक्षा बल के सेकंड इन कमांड पराग चतुर्वेदी मौजूद रहे।एवं कार्यक्रम की अध्यक्षता कुलगुरु के जी सुरेश ने किया।

कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में सशस्त्र सुरक्षा बल के सेकण्ड इन कमांड पराग चतुर्वेदी ने संबोधित करते हुए नशे को लेकर कई बारीकियों के बारे में जानकारी दी।उन्होंने बताया कि भारत सैंडविच की भांति गोल्डन क्रिसेंट एवं गोल्डन ट्रेंगल के बीच स्थित है।गोल्डन ट्रेंगल में तीन देश म्यामांर,थाईलैंड और लाओस एवं गोल्डन क्रिसेंट में ईरान,अफगानिस्तान,पाकिस्तान देश शामिल हैं।नेपाल से भी भारत मे भारी मात्रा में चरस पहुंचता है।उन्होंने वक्तव्य में कहा कि यदि कोई आतंकी हमला देश मे होता है।तो 100-200 लोग मारे जाते हैं।

लेकिन यदि देश मे ड्रग्स दूसरे देशों से पहुंचता है।तो लाखों युवा इसकी जद में पहुंचते है।और हजारों परिवार तबाह हो जाते हैं।इसलिए आतंकी हमले रोकने से भी ज्यादा जरूरी देश मे ड्रग्स के कारोबार में रोक लगाना है।उन्होंने आगे बताया कि भारत मे गोल्डन ट्रेंगल मौजूद है।

उत्तरप्रदेश,मध्यप्रदेश और राजस्थान।उत्तरप्रदेश में बाराबांकी,बरेली,फैजाबाद,लखनऊ।मध्यप्रदेश में नीमच,रतलाम,मंदसौर और राजस्थान में प्रतापगढ़ ऐसे इलाके हैं।जहां पर भारत सरकार द्वारा किसानों द्वारा खेती कराई जाती है।हालांकि इनके उत्पादन से औषधियों में इस्तेमाल होता है।लेकिन कई बार ऐसे खबरें आती हैं।जहां इसकी खेती करने वाले किसान दुरुपयोग करते हैं।उन्होंने बताया कि बाराबंकी इलाके के दो गांव टीकरा उसमा और टीकरा मुख्तजा में हीरोइन बनाने का कार्य किया जाता है।और वहां पर लगभग 1500 करोड़ रुपये से अधिक का व्यापार वर्ष भर में किया जाता है।

उन्होंने कानून के बारे में जानकारी देते हुए बताया।कि भारत मे 5 ग्राम से अधिक कोकीन यदि किसी व्यक्ति के पास पाई जाती है।तो कानूनन उसे 10 वर्ष तक कैद और जुर्माने का कानून है।उन्होंने कहा की युवा नशा न करें।नशा करने से केवल उस व्यक्ति की ही हानि नहीं होती।जो नशा करता है बलिक उसके परिवार की भी तबाही होती है।उन्होंने पत्रकारिता के छात्रों से अपील करते हुए कहा कि इस जागरूकता अभियान को अपने लेखों से आम नागरिकों तक पहुंचाएं।और ऐसे व्यक्ति जो नशे की जद में आ चुके हैं।उनके नशे को छुड़ाने के लिए नशा मुक्ति केंद्र के माध्यम से उनकी मदद करें।

जागरूकता अभियान से युवाओं को नशे की लत से रोका जा सकता है:के जी सुरेश

माखनलाल चतुर्वेदी विश्वविद्यालय के कुलगुरु के जी सुरेश ने अपने संबोधन में कहा कि जागरूकता ही एक ऐसा माध्यम है जिससे नशे की लत में जा रहे युवाओं को रोका जा सकता है।उन्होंने अपने संस्मरण को याद करते हुए बताया कि एक समय ऐसा था कि दिल्ली में आतंकी हमले बहुत ज्यादा होते थे।तब उस समय जागरूकता अभियान चलाया गया।प्रत्येक व्यक्ति किसी भी सूटकेस,बैग को कहीं भी जगह पर पड़े होने पर तत्काल पुलिस को सूचित करने लगे।लोग कार या बस में बैठने से पहले सीटों के नीचे देख कर तसल्ली करने लगे कि कोई संदिग्ध वस्तु तो नहीं है।पहले लोग कुछ भी सामान बैग पर्स पड़ा होने पर उठा ले जाया करते थे।

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लेकिन जागरूकता अभियान के चलते लोग अब ऐसा नहीं करते।इससे आतंकी हमलों में भी कमी आई है।इसी प्रकार अब जागरूकता अभियान के माध्यम से आम नागरिकों को जागरूक करना होगा।कि नशा कितना दुष्प्रभावी है।उन्होंने पत्रकारिता के छात्रों से अपने संबोधन के दौरान कहा कि सफल पत्रकारिता वही है जब आपकी लेखनी से किसी भी व्यक्ति के जीवन मे आवश्यक बदलाव हो सके।

मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी हानिकारक है नशा:राखी तिवारी

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पत्रकारिता विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ आरती तिवारी ने कहा कि मादक पदार्थों के सेवन से स्वास्थ्य तो खराब होता ही है।बलिक यह मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी हानिकारक है।हमें नशे करने वाले व्यक्ति से लड़ाई नहीं लड़नी है बल्कि हमे नशे से लड़ना है।नशे से सामाजिक,आर्थिक एवं पारिवारिक हानि भी होती है।जनस्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए नशे करने वाले व्यक्तियों की पहचान करनी होगी।और उन्हें नशा छोड़ने के लिए मदद करनी होगी।यह तभी संभव है जब हम सभी मिलकर इसे रोकने का प्रयास करेंगे.

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ये रहे शामिल

कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में सशस्त्र सुरक्षा बल के सेकंड इन कमांड पराग चतुर्वेदी, विश्वविद्यालय के कुलगुरु के जी सुरेश,कुलसचिव,पत्रकारिता विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ राखी तिवारी,भोपाल कैम्पस में मौजूद समस्त विभाग में अध्ययन रत छात्रा-छात्राएं,विश्वविद्यालय के समस्त प्राध्यापक,पुरा छात्र,खंडवा,दतिया एवं रीवा परिसर के समस्त छात्र छात्राएं एवं प्रोफेसर, विश्वविद्यालय से संबंद्धता रखने वाले समस्त महाविद्यालयों के छात्र छात्राएं एवं स्टाफ ऑनलाइन कार्यक्रम में मौजूद रहे।