मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने एक आपराधिक प्रकरण में आरोपी को मिली जमानत को रद्द कराने की मांग वाली याचिका खारिज कर दी है। न्यायमूर्ति आरके चौबे की एकलपीठ ने कहा कि जमानत देने और रद्द करने की प्रक्रियाएं भिन्न हैं तथा पूर्व में दी गई राहत वापस लेने के लिए अत्यंत ठोस और असाधारण परिस्थितियाँ आवश्यक होती हैं। नर्मदापुरम निवासी सचिन ठाकुर ने राकेश रघुवंशी की जमानत रद्द करने की मांग की थी। उच्च न्यायालय ने निचली अदालत के फैसले को उचित ठहराते हुए कहा कि मात्र आरोपों के आधार पर जमानत निरस्त नहीं की जा सकती।