सीहोर के 63 वर्षीय विवेक रुठिया को प्रथम विश्व युद्ध के दौरान उनके दादा सेठ जुम्मालल रुठिया द्वारा ब्रिटिश भारत सरकार को दिए गए 35,000 रुपये के कर्ज पर ब्रिटेन के ऋण प्रबंधन कार्यालय से पहला आधिकारिक जवाब मिला है। यह कर्ज 4 जून 1917 को 5.5 प्रतिशत ब्याज के वादे पर दिया गया था। रुठिया परिवार ने मूल प्रमाणपत्र को एक सदी से अधिक समय से सहेज कर रखा है। ब्रिटेन के प्राधिकरण ने अब दावे की पुष्टि के लिए मूल दस्तावेजों की प्रतियां मांगी हैं, जिसे विवेक रुठिया सम्मान और अहम की लड़ाई मान रहे हैं।