मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की ग्वालियर खंडपीठ ने पटवारी भर्ती से जुड़े एक मामले में राज्य सरकार को राहत दी है। खंडपीठ ने सिंगल बेंच के उस आदेश को निरस्त कर दिया, जिसमें एक अभ्यर्थी को पटवारी पद पर नियुक्ति देने के निर्देश थे। अदालत ने स्पष्ट किया कि केवल डिप्लोमा जारी होने से पात्रता सिद्ध नहीं होती, बल्कि संबंधित संस्थान और पाठ्यक्रम की नियमानुसार मान्यता भी साबित करनी होगी। राज्य सरकार ने शेर सिंह रावत की नियुक्ति के आदेश को चुनौती दी थी, क्योंकि उनका डिप्लोमा एक गैर-मान्यता प्राप्त डिस्टेंस एजुकेशन सेंटर से था।