वर्ष 1857 में भारत की आजादी की पहली चिंगारी भड़कने के साथ ही भोपाल रियासत की सैन्य छावनी सीहोर में भी अंग्रेजों के खिलाफ विद्रोह शुरू हो गया था। 6 अगस्त 1857 को रिसालदार वली शाह और कोठ हवलदार महावीर कोठ के नेतृत्व में सैनिकों ने बगावत कर ‘सिपाही बहादुर सरकार’ का गठन किया। क्रांतिकारियों ने सरकारी तंत्र पर कब्जा कर लिया। इसी दौरान रानी लक्ष्मीबाई ने नवाब सिकंदर बेगम से क्रांतिकारियों का समर्थन करने की अपील की, जिसे बेगम ने अस्वीकार कर दिया। 14 जनवरी 1858 को अंग्रेज जनरल ह्यू रोज की सेना ने सीहोर में 356 क्रांतिकारियों को शहीद कर दिया। वली शाह और महावीर कोठ को 2 फरवरी 1858 को फांसी दी गई।