पन्ना में दो मासूम बच्चे सड़क किनारे सपेरा बनकर अपनी जीविका चला रहे हैं। एक बच्चे के सामने टोकरी में काला नाग था, जिसे वह संभाल रहा था, जबकि दूसरा छोटा बच्चा देख रहा था। शिक्षा के अधिकार और सरकारी योजनाओं के बावजूद, गरीब परिवारों के ये बच्चे दो वक्त की रोटी के लिए जान जोखिम में डालकर यह काम कर रहे हैं। यह बाल श्रम और वन्य जीव संरक्षण कानूनों का उल्लंघन भी है। समाजसेवियों ने प्रशासन से इन बच्चों की पहचान कर उन्हें शिक्षा से जोड़ने और परिवारों को वैकल्पिक आजीविका प्रदान करने की मांग की है।