संसदीय समिति ने पहली पीढ़ी के उद्यमियों के लिए एक अलग ‘सपोर्ट सेल’ बनाने की सिफारिश की है। समिति का मानना है कि ऐसे उद्यमियों को बड़े औद्योगिक घरानों के समान सरकारी सुविधाओं तक आसान पहुंच मिलनी चाहिए। इसके लिए डिजिटल सिंगल-विंडो व्यवस्था को मजबूत करने, फास्ट-ट्रैक सुविधा देने और अनुपालन प्रक्रियाओं को सरल बनाने का सुझाव दिया गया है। इसका उद्देश्य कारोबार शुरू करने की प्रक्रिया को आसान बनाना है, ताकि उद्यमी विभिन्न सरकारी दफ्तरों के बजाय एक ही प्लेटफॉर्म से सभी आवश्यक काम पूरे कर सकें।
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की पांच जजों की वृहद पीठ ने सरकारी ठेकों और ब्लैकलिस्टिंग पर ऐतिहासिक निर्णय दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी ठेकेदार को ब्लैकलिस्ट करना उसकी व्यावसायिक मृत्यु के समान है, और इससे होने वाली गैर-मौद्रिक क्षति का आकलन नहीं हो सकता। ऐसे मामले मध्य प्रदेश मध्यस्थम अधिकरण अधिनियम, 1983 के क्षेत्राधिकार से बाहर हैं, और प्रभावित ठेकेदार सीधे हाई कोर्ट में रिट याचिका दायर कर सकते हैं। यह निर्णय मेसर्स नितिन एंटरप्राइजेज के मामले में आया, जिन्हें नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने ब्लैकलिस्ट किया था।