बुलंद सोच, भिंड।

भिंड के 28 वर्षीय शिवम सिंह राजावत ने देश सेवा के बाद समाज सेवा का उदाहरण प्रस्तुत किया है। उन्होंने सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) में लगभग तीन साल तक आरक्षक के पद पर सेवाएं दीं। इसके बाद शिवम ने सरकारी नौकरी छोड़कर जरूरतमंद बच्चों के भविष्य को संवारने का संकल्प लिया। वर्तमान में वह उन बच्चों को निःशुल्क शिक्षा उपलब्ध करा रहे हैं, जिनके परिवार आर्थिक रूप से कमजोर हैं और जिनके लिए बेहतर शिक्षा प्राप्त करना आसान नहीं है।
समाज सेवा की प्रेरणा और पारिवारिक विरोध
शिवम सिंह राजावत के अनुसार, उनके मन में बचपन से ही समाज के लिए कुछ अलग करने की इच्छा थी। बीएसएफ में नौकरी के दौरान भी उनके मन में यह विचार लगातार चलता रहा कि आर्थिक परिस्थितियों के कारण शिक्षा से वंचित हो रहे बच्चों के लिए कुछ किया जाए। उनका मानना है कि किसी जरूरतमंद बच्चे को शिक्षा देना उसे आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में सबसे मजबूत कदम हो सकता है। इसी सोच ने उन्हें सरकारी नौकरी छोड़ने जैसा कठिन निर्णय लेने के लिए प्रेरित किया। शिवम के इस निर्णय पर शुरुआत में परिवार और रिश्तेदारों ने विरोध किया। परिजनों का तर्क था कि सरकारी नौकरी मिलना आसान नहीं होता और नौकरी छोड़कर अनिश्चित रास्ते पर जाना उचित नहीं है।
प्रयासों का परिणाम और बढ़ते सहयोग
विरोध के बावजूद शिवम अपने फैसले पर कायम रहे। आज उनके प्रयासों से जरूरतमंद बच्चों को शिक्षा मिल रही है और उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव दिखाई देने लगा है। अब वही परिवार और रिश्तेदार उनके निर्णय से प्रसन्न हैं और उनके इस सामाजिक कार्य में सहयोग भी कर रहे हैं। शिवम सिंह राजावत स्नातक हैं और अपने दो भाइयों में बड़े हैं। उनके पिता जिला पंचायत कार्यालय में कार्यरत हैं।
पहल का विस्तार और सदस्यों का जुड़ाव
शिवम ने बताया कि जब उन्होंने इस पहल की शुरुआत की थी, तब कुछ लोगों ने उनके प्रयासों पर सवाल उठाए थे। कई लोगों का कहना था कि वह यह काम केवल फोटो खिंचवाने या खबरों में आने के लिए कर रहे हैं। हालांकि, समय के साथ लोगों की सोच बदली और उनके काम पर विश्वास बढ़ा। वर्तमान में शिवम के साथ लगभग 40 सक्रिय सदस्य जुड़े हुए हैं। इन सदस्यों में विभिन्न जिलों और राज्यों में अलग-अलग विभागों में कार्यरत लोग भी शामिल हैं। ये सदस्य अपने स्तर पर जरूरतमंद बच्चों को शिक्षा उपलब्ध कराने के साथ-साथ आर्थिक सहयोग भी करते हैं। वे समय-समय पर बच्चों की पढ़ाई, शैक्षणिक सामग्री और अन्य जरूरतों में भी मदद करते हैं।
शिक्षा से परिवारों में सकारात्मक बदलाव
शिवम बताते हैं कि शुरुआत में जब वह जरूरतमंद परिवारों से उनके बच्चों को पढ़ाने की बात करते थे, तो अभिभावकों का ज्यादा रुझान नहीं रहता था। कई परिवार आर्थिक परेशानियों के कारण बच्चों की पढ़ाई से अधिक रोजमर्रा की जरूरतों को प्राथमिकता देते थे। ऐसे में बच्चों को नियमित रूप से शिक्षा से जोड़ना भी एक चुनौती थी। लेकिन लगातार प्रयासों के बाद अब स्थिति बदल रही है। बच्चे पढ़ाई के प्रति रुचि दिखा रहे हैं और उनके अभिभावकों में भी शिक्षा को लेकर जागरूकता बढ़ी है। शिवम के अनुसार, उनकी पहल का असर केवल बच्चों की पढ़ाई तक सीमित नहीं है। शिक्षा से जुड़ने के बाद कुछ बच्चों के परिवारों में भी सकारात्मक बदलाव आया है। उन्होंने बताया कि कुछ बच्चों के माता-पिता ने नशे की आदत तक छोड़ दी है।

